तमिलनाडु दीपम विवाद: कोर्ट ने 5 लोगों की टीम को दीया जलाने का सुझाव दिया

Tamil Nadu Deepam controversy: Court suggests a team of 5 people to light the diyasचिरौरी न्यूज

चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तिरुप्परंकुंड्रम में दीपम जलाने के विवाद पर सुनवाई करते हुए एक सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि कोर्ट द्वारा नामित पाँच लोगों के एक समूह को पहाड़ी पर स्थित दीपथून (दीप स्तंभ) तक जाकर 15 मिनट के लिए प्रतीकात्मक पूजा करने की अनुमति दी जा सकती है।

न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा कि जिला कलेक्टर ने अपने हलफनामे में बताया है कि BNSS की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी। इसका उद्देश्य मंदिर अधिकारियों को दीपम जलाने से रोकना नहीं था। लेकिन हकीकत यह है कि कोर्ट के आदेश को जमीन पर लागू नहीं किया जा सका। जज ने कहा, “सबूत तो काम होने से ही मिलता है,” और माना कि पुलिस ने कलेक्टर के आदेश का हवाला देकर कोर्ट के निर्देश को लागू करने में रुकावट डाली।

यह अवमानना याचिका उस पहले आदेश के पालन न होने को लेकर दायर की गई थी, जिसमें अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के पास पहाड़ी पर दीपम जलाने की अनुमति दी गई थी।

मदुरै के जिला कलेक्टर के.जे. प्रवीणकुमार ने अपने हलफनामे में कहा कि मंदिर प्रबंधन तभी हाई कोर्ट के आदेश को लागू कर सकता है जब इलाके में कोई अशांति न हो। उन्होंने कहा कि निषेधाज्ञा का मतलब मंदिर अधिकारियों को दीप जलाने से रोकना बिल्कुल नहीं था।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि पिछले सौ साल से अधिक समय से कार्तिगई दीपम केवल पहाड़ी के ऊपर उचि पिल्लयार मंदिर के पास ही जलाया जाता रहा है और इस परंपरा को बदला नहीं जा सकता। इससे पहले हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी दीपम को निर्धारित स्तंभ पर जलाने की अनुमति देने वाले एकल पीठ के आदेश को सही ठहराया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पाँच लोगों को प्रतीकात्मक पूजा की अनुमति देने का सुझाव सिर्फ पहले आदेश का सम्मान दिखाने के लिए है, यह कोई अंतिम आदेश नहीं है। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि उन्हें सरकार से निर्देश नहीं मिले हैं और उन्होंने समय मांगा है।

सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने दूसरी बार बिना शर्त माफी मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अगली तारीख पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी। अदालत ने तमिलनाडु के मंत्री रेगुपति के खिलाफ अवमानना की एक अलग याचिका को फिलहाल बंद कर दिया, लेकिन कहा कि जरूरत पड़ने पर इसे फिर से खोला जा सकता है।

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