राज ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति में फेरबदल की अटकल
चिरौरी न्यूज
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। कुछ ही दिन पहले तक ठाकरे परिवार की एकता को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। वर्षों बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच की दूरियां मिटती दिखीं थीं और माना जा रहा था कि दोनों मिलकर मुंबई महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। लेकिन अब घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है।
बुधवार को मुंबई के ट्रांसपोर्ट और बिजली आपूर्ति विभाग की कर्मचारी यूनियन चुनाव में ठाकरे गुट के समर्थित उम्मीदवारों की करारी हार ने सभी को चौंका दिया। बीजेपी गठबंधन समर्थित उम्मीदवारों ने 21 में से 7 सीटें जीत लीं। इस हार के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान भी काफी सख्त रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि “लोगों ने ‘ठाकरे ब्रांड’ को खारिज कर दिया है”, और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े नेता पर पैसे के बदले वोट खरीदने के आरोप भी लगाए गए।
लेकिन असली राजनीतिक हलचल गुरुवार को मची, जब राज ठाकरे ने अचानक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। यह बैठक कई अटकलों को जन्म दे गई — क्या ठाकरे भाइयों की ताजा बनी एकता में फिर से दरार पड़ रही है? क्या राज ठाकरे एक बार फिर सत्ताधारी बीजेपी के करीब जा रहे हैं?
हालांकि राज ठाकरे ने इन अफवाहों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि यह बैठक सिर्फ “शहरी नियोजन और ट्रैफिक समस्या” से जुड़ी थी। उन्होंने कहा, “मुंबई में ट्रैफिक बड़ा मुद्दा है। लोग वाहन कहीं भी पार्क कर देते हैं। मैंने इस मुद्दे पर एक प्रजेंटेशन तैयार किया है और मुख्यमंत्री व मुंबई पुलिस से इस पर गंभीरता से काम करने का आग्रह किया है।”
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी इस बैठक को सामान्य बताया और कहा, “महाराष्ट्र की परंपरा है कि लोग प्रमुख नेताओं से मिलते रहते हैं। इसमें कोई खास मतलब निकालने की जरूरत नहीं है।”
यह सब उस वक्त हो रहा है जब कुछ ही दिन पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एकजुटता को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा था, “अब मराठी मानुष की एकजुटता को कोई ताकत नहीं तोड़ सकती।” यह बयान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आया था और पूरे आत्मविश्वास से कहा गया था कि मुंबई महानगरपालिका चुनाव में ठाकरे भाई मिलकर जीत दर्ज करेंगे।
दोनों भाइयों की दूरी नवंबर 2005 में आई थी, जब बाल ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना में नेतृत्व को लेकर विवाद हुआ। लेकिन जुलाई 2025 में राज ठाकरे को उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर ‘मातोश्री’ बुलाया गया, और इसे राजनीतिक मेल-मिलाप का संकेत माना गया।
बीजेपी हालांकि ठाकरे भाइयों की एकता से चिंतित नहीं दिख रही है। कर्मचारी यूनियन चुनाव में ठाकरे समर्थकों की हार ने बीजेपी को यह कहने का मौका दे दिया कि यह गठबंधन कोई चुनावी खतरा नहीं है।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह फडणवीस-राज ठाकरे की मुलाकात महज एक औपचारिकता थी या महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए रिअलाइनमेंट की आहट? मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले ये संकेत निश्चित रूप से अहम हैं।
