अमेरिका–भारत ट्रेड डील पर पाकिस्तान में बवाल, ट्रम्प से महीनों की ‘डिप्लोमेसी’ बेअसर

The US-India trade deal sparks controversy in Pakistan; months of diplomacy with Trump prove ineffective.
(Pic: DDnewslive/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न व्यापार समझौते को लेकर पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आलोचकों का कहना है कि वॉशिंगटन के साथ महीनों तक चली हाई-प्रोफाइल आउटरीच के बावजूद पाकिस्तान को ठोस लाभ नहीं मिला, जबकि भारत ने अपेक्षाकृत सख्त रुख अपनाते हुए बेहतर सौदा हासिल कर लिया।

समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 18 प्रतिशत तय किया गया है, जो पाकिस्तान पर लगाए गए 19 प्रतिशत शुल्क से एक प्रतिशत कम है। इस फैसले ने पाकिस्तान में नाराज़गी और हैरानी दोनों पैदा की है, खासकर इसलिए क्योंकि इस्लामाबाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मनाने के लिए कई प्रतीकात्मक कदम उठाए थे—जिनमें उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करना और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल करने का समर्थन भी बताया जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इंडिया गेट की तस्वीरें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी एक मैगज़ीन कवर साझा करने के बाद भारत के लिए टैरिफ कटौती की घोषणा की। इसके उलट, पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर तीखे और व्यंग्यात्मक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई।

एक वायरल पोस्ट में पाकिस्तान स्थित एक्स (X) यूज़र उमर अली ने सैन्य नेतृत्व पर तंज कसते हुए लिखा कि ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे “काम निकलवाने के बाद कोई जिम्मेदारी न लेने वाला रिश्ता।” पोस्ट के साथ एक एआई-जनरेटेड तस्वीर भी साझा की गई, जिसमें फील्ड मार्शल असीम मुनीर को खनिजों का बॉक्स पकड़े दिखाया गया।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के पूर्व मंत्री हम्माद अज़हर ने इसे रणनीतिक विफलता बताया। उन्होंने लिखा, “21वीं सदी की विदेश नीति फोटो-ऑप्स या व्यक्तिगत रिश्तों से नहीं चलती। यह आर्थिक ताकत, टैरिफ और मार्केट एक्सेस पर आधारित होती है। भारत के हालिया ईयू और अमेरिका के साथ समझौते इसका प्रमाण हैं।”

पत्रकार असद तूर ने चेतावनी दी कि यह टैरिफ फैसला पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालेगा। उन्होंने गिरते निर्यात, घटते विदेशी निवेश और देश की सौदेबाजी की क्षमता में कमी की ओर इशारा किया। वहीं पत्रकार इमरान रियाज़ खान ने लॉबिंग रणनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “आप लकड़ी के बक्सों में बलूचिस्तान के खनिज दे सकते हैं, लेकिन सम्मान नहीं खरीद सकते।”

डिजिटल क्रिएटर वजाहत खान ने लिखा, “ट्रंप एक बिज़नेसमैन हैं। उन्होंने भारत को पार्टनर की तरह देखा और पाकिस्तान को दुकानदार की तरह। नतीजा सामने है—18 प्रतिशत बनाम 19 प्रतिशत।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह समझौता, यूरोपीय संघ के साथ हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के साथ मिलकर, अगले एक दशक में करीब 150 अरब अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त निर्यात का रास्ता खोल सकता है। पाकिस्तान में विपक्ष अब इस तुलना को सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रहा है, यह कहते हुए कि भारत ने “रणनीतिक स्वायत्तता” के साथ बातचीत की, जबकि पाकिस्तान व्यक्तिगत संबंधों पर अधिक निर्भर रहा।

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