इस्लामिक ग्रूमिंग गैंग, एंटी-इमिग्रेशन जैसी मुद्दों पर टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में लंदन में ऐतिहासिक रैली
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: एंटी-इमिग्रेशन भावना, तीव्र राष्ट्रवाद और ‘इस्लामिक ग्रूमिंग गैंग’ जैसे विवादास्पद मुद्दों को केंद्र में रखते हुए लंदन की सड़कों पर शनिवार को इतिहास रच दिया गया, जब टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में एक विशाल रैली निकाली गई। यह प्रदर्शन न केवल ब्रिटेन में उभरते दक्षिणपंथी आंदोलन की शक्ति का प्रतीक बना, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश में प्रवासन, पहचान और सामाजिक संतुलन को लेकर बहस किस कदर उग्र हो चुकी है।
ब्रिटिश इतिहास की सबसे बड़ी दक्षिणपंथी रैली में टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में “यूनाइट द किंगडम” रैली में 1,10,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन ब्रिटेन में तेजी से बढ़ रही एंटी-इमिग्रेशन भावना, राष्ट्रवाद, और स्वतंत्रता की रक्षा के नाम पर आयोजित किया गया।
मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले की खबरें भी सामने आईं, जिसके चलते 1,600 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, जिनमें 500 अधिकारी अन्य जिलों से बुलाए गए थे। पुलिस ने बताया कि पूरे दिन कई बार तनाव की स्थिति बनी रही और टकराव रोकने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।
टॉमी रॉबिन्सन की रैली
टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन यैक्सली-लेनन है, ने इस रैली को “आजादी और फ्री स्पीच का उत्सव” बताया। उन्होंने दावा किया कि “लाखों लोग लंदन की सड़कों पर उमड़े हैं”, जबकि पुलिस के आंकड़े इससे काफी कम हैं। रॉबिन्सन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “हजारों की भीड़ सेंट्रल लंदन में इकट्ठा है, हम एकजुट होकर अपनी आजादी के लिए खड़े हैं।”
इस रैली में लोग यूनियन जैक, सेंट जॉर्ज का क्रॉस, और यहां तक कि अमेरिकी और इज़राइली झंडे भी लहरा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने “Make America Great Again” टोपी पहन रखी थी, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की पहचान मानी जाती है।
‘इस्लामिक ग्रूमिंग गैंग’ का मुद्दा
ब्रिटेन में पिछले एक दशक से ‘इस्लामिक ग्रूमिंग गैंग’ का मुद्दा न केवल राजनीतिक विमर्श का केंद्र रहा है, बल्कि सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का भी एक प्रमुख कारण बन चुका है। कई हाई-प्रोफाइल मामलों — जैसे रोदरहैम, रोचडेल और ऑक्सफोर्ड — में यह सामने आया कि संगठित समूहों द्वारा, जिनमें अधिकांश आरोपी पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम थे, सैकड़ों ब्रिटिश किशोरियों का यौन शोषण किया गया। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, इन मामलों में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की विफलता ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में वर्षों तक देरी की। यह मुद्दा ब्रिटेन में प्रवासन, धार्मिक कट्टरता और सामाजिक ताने-बाने को लेकर गहराते तनाव का प्रतीक बन गया है, जिसे दक्षिणपंथी नेताओं ने बार-बार अपनी राजनीति के केंद्र में रखा है। इंग्लैंड और वेल्स में अप्रैल 2023 से स्थापित इस विशेष पुलिस इकाई ने अपने पहले साल में 550 से अधिक संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार किया, साथ ही लगभग 4,000 से अधिक पीड़ितों को सुरक्षित किया गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार हुआ टकराव
मार्च के दौरान पुलिस ने बताया कि “यूनाइट द किंगडम” के कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा बनाए गए “स्टरल ज़ोन” में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जहां “Stand Up to Racism” नामक काउंटर-प्रोटेस्ट भी हो रहा था। लगभग 5,000 लोग इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए।
पुलिस को सुरक्षात्मक गियर, घुड़सवार दस्ते, और अतिरिक्त बलों की मदद लेनी पड़ी। कई अफसरों पर हमले की पुष्टि करते हुए, पुलिस ने कहा कि स्थिति लगातार संवेदनशील बनी रही।
रैली में शामिल एक समर्थक ने कहा, “हम अपना देश वापस चाहते हैं। हमें फ्री स्पीच चाहिए। सरकार को अवैध प्रवासियों को रोकना चाहिए। हम टॉमी में विश्वास करते हैं।”
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के खिलाफ नारे लगाए और “Send Them Home” जैसे भड़काऊ पोस्टर भी लहराए। कुछ लोगों ने अपने बच्चों को भी प्रदर्शन में शामिल किया।
हालांकि रॉबिन्सन खुद को एक “पत्रकार और सच उजागर करने वाला” बताते हैं, लेकिन उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण ब्रिटेन की प्रमुख एंटी-इमिग्रेशन पार्टी Reform UK ने उनसे दूरी बना रखी है, भले ही वह पार्टी हालिया जनमत सर्वेक्षणों में मजबूती से उभरी है।
इमिग्रेशन और आर्थिक संकट बना राजनीति का केंद्रबिंदु
ब्रिटेन में इस साल अब तक 28,000 से अधिक शरणार्थी छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार कर चुके हैं, जिससे इमिग्रेशन एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। आर्थिक संकट और महंगाई की चिंता को यह मुद्दा पीछे छोड़ चुका है।
रेड और व्हाइट फ्लैग्स (St George’s Cross) अब ब्रिटेन की सड़कों और दीवारों पर सामान्य हो गए हैं। जहां समर्थक इसे राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक मानते हैं, वहीं एंटी-रेसिज़्म समूह इसे विदेशियों के प्रति शत्रुता का प्रतीक बता रहे हैं।
कमांडर क्लेयर हेन्स का बयान
लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस की कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा, “हम बिना किसी पक्षपात के प्रदर्शन को संभालते हैं। लेकिन हम किसी भी अपराध या हिंसा को लेकर सख्त हैं। लंदन की विविधता और उसके नागरिकों को डर के मारे घर में बंद नहीं होना चाहिए।”
यह रैली उस गर्मियों की परिणति थी, जिसमें ब्रिटेन में माइग्रेंट होटलों के बाहर विरोध प्रदर्शन, सांप्रदायिक बयानबाज़ी, और फ्री स्पीच बनाम हेट स्पीच की बहस जोर पकड़ चुकी थी। अब यह साफ है कि ब्रिटेन में राष्ट्रवाद बनाम बहुसंस्कृतिवाद की लड़ाई आने वाले समय में और तेज होने वाली है।
