उद्धयनिधि स्टालिन के ‘सनातन धर्म’ बयान नफरत फैलाने वाले भाषण: मद्रास हाईकोर्ट

Udhayanidhi Stalin's 'Sanatana Dharma' statement is hate speech: Madras High Courtचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उद्धयनिधि स्टालिन को लेकर एक बड़ी कानूनी टिप्पणियों में बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि साल 2023 में उनके द्वारा किए गए सनातन धर्म पर विवादित बयान नफरत फैलाने वाला भाषण (Hate Speech) है और इसे हिंदू धर्म पर सीधा हमला माना जा सकता है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट बयान

मदुरै बेंच ने कड़ी टिप्पणियों में कहा कि डॉ. एमके स्टालिन के बेटे उद्धयनिधि स्टालिन उस विचारधारा से जुड़े हैं, जिसकी जड़ें पिछले 100 सालों से डीएमके में रही हैं। कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि अक्सर नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जबकि उन पर जो प्रतिक्रिया देते हैं, उन्हें कानून की कठोर कार्रवाई झेलनी पड़ती है।

कोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि पिछले 100 सालों से हिंदू धर्म पर हमला होता रहा है। जबकि पूरे परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो याचिकाकर्ता ने मंत्री के भाषण के छिपे अर्थ पर सवाल उठाया।”

मामले की पृष्ठभूमि

सितंबर 2023 में उद्धयनिधि स्टालिन ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, “कुछ चीजें विरोध नहीं कर सकतीं, उन्हें समाप्त करना चाहिए। जैसे हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं कर सकते, हमें उन्हें खत्म करना होगा। उसी तरह, सनातन को विरोध करने की बजाय समाप्त करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है और जाति और धर्म के आधार पर विभाजन को गहरा करता है।

इसके बाद आलोचकों ने इसे सनातन धर्म का पालन करने वालों के “नरसंहार” के लिए आह्वान बताया। उद्धयनिधि स्टालिन ने बाद में इसे खारिज किया और कहा कि उनका इरादा किसी नरसंहार का नहीं था।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उद्धयनिधि के शब्दों का अर्थ वास्तव में नरसंहार या नफरत फैलाने वाले भाषण जैसा ही था। कोर्ट ने कहा, “यदि सनातन धर्म का पालन करने वाले समूह का अस्तित्व नहीं रहना चाहिए, तो इसे ‘नरसंहार’ कहा जाएगा। यदि सनातन धर्म को धर्म माना जाए, तो यह ‘धर्मसंहार’ होगा। यह किसी भी तरीके से लोगों के नाश का संकेत देता है, जिसमें पारिस्थितिकी, तथ्य या संस्कृति का विनाश भी शामिल है। इसलिए तमिल शब्द ‘सनातना ओझिप्पु’ स्पष्ट रूप से नरसंहार या सांस्कृतिक विनाश को दर्शाता है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा मंत्री के भाषण पर सवाल उठाना नफरत फैलाने वाला भाषण नहीं माना जाएगा।

इस विवाद के बीच उद्धयनिधि ने अपने बयान का बचाव किया और कहा कि वे अपने बयान पर दृढ़ हैं। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी।

यह हाईकोर्ट का फैसला उस समय आया है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर पकड़ रही है, जो मई से पहले होने हैं।

 

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