‘विकसित भारत–जी राम जी’ कानून आत्मनिर्भर गाँवों की दिशा में बड़ा कदम: शिवराज सिंह चौहान

‘Viksit Bharat – G Ram G’ law is a big step towards self-reliant villages: Shivraj Singh Chouhan
(File Pic: Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ‘विकसित भारत–जी राम जी’ कानून देश में आत्मनिर्भर और समृद्ध गाँवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। तमिलनाडु के इरोड में श्रमिकों और मज़दूरों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून रोजगार सृजन को सशक्त बनाने, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित गाँवों का लक्ष्य जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व व्यवस्था में मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी तो थी, लेकिन कई स्थानों पर न तो समय पर काम मिलता था और न ही मज़दूरी का भुगतान होता था। इन कमियों को दूर करने और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए सरकार ने नए कानून के तहत व्यापक सुधार किए हैं।

चौहान ने बताया कि अब रोजगार गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यदि तय अवधि में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मज़दूरों को बेरोज़गारी भत्ता मिलेगा। वहीं, यदि मज़दूरी भुगतान में 15 दिनों से अधिक की देरी होती है तो उस पर ब्याज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है।

उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत ग्राम सभाओं को सशक्त किया गया है और अब गाँवों के विकास से जुड़े निर्णय गाँव स्तर पर ही लिए जाएंगे। विकास कार्यों का फैसला अब दिल्ली या चेन्नई में नहीं, बल्कि ग्राम सभाओं में होगा।

चौहान ने कुछ वर्गों द्वारा योजना को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने यह सुधार इसलिए किए हैं ताकि श्रमिकों का पैसा सीधे उनके बैंक खातों में पहुँचे और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

हल्दी नगरी इरोड में परीक्षण प्रयोगशाला की घोषणा

केंद्रीय मंत्री ने इरोड के प्रसिद्ध हल्दी बाजार का दौरा कर किसानों और व्यापारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने ‘हल्दी नगरी’ इरोड में परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की घोषणा की और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला गुणवत्ता परीक्षण, प्रमाणन और बेहतर विपणन में किसानों की मदद करेगी।

उन्होंने इरोड में हल्दी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना का भी आश्वासन दिया और कहा कि इससे किसानों को नीतिगत सहयोग, बेहतर बाजार पहुँच और नए निर्यात अवसर मिलेंगे।

चौहान ने क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इन्हें विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और आरकेवीवाई के तहत स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने तस्करी के जरिए लाई जाने वाली हल्दी पर रोक लगाने और इन मुद्दों के समाधान के लिए दिल्ली में बैठक बुलाने की बात कही। साथ ही, उन्होंने अच्छे गुणवत्ता वाले बीज को कृषि की नींव बताते हुए बीज विकास पर बल दिया।

महिला किसानों और नवाचारों से संवाद

केंद्रीय मंत्री ने कृषि नवाचारों की समीक्षा करते हुए 100 से अधिक स्टालों का निरीक्षण किया और किसानों व उद्यमियों से उनके उत्पादों पर चर्चा की। उन्होंने 1,000 से अधिक महिला किसानों से संवाद किया तथा विभिन्न किसान संगठनों और प्रगतिशील किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उन्होंने सहभागिता की।

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