पश्चिम बंगाल: न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम गिरफ्तार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया। इस्लाम पर मालदा में हुए उस विवादित प्रदर्शन का मास्टरमाइंड होने का आरोप है, जिसमें सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बना लिया गया था। पुलिस ने उसे बागडोगरा एयरपोर्ट से उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वह राज्य से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था।
बताया जा रहा है कि इस्लाम पेशे से वकील है और 2021 के विधानसभा चुनाव में इटाहार सीट से AIMIM के उम्मीदवार रह चुका है।
बुधवार को मालदा के कालियाचक-II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए, जब भीड़ ने सात SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अधिकारियों को घेरकर अंदर ही बंधक बना लिया। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं और एक अधिकारी का पांच साल का बच्चा भी वहीं मौजूद था।
यह पूरा विवाद भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR अभियान को लेकर सामने आया है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची से 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि करीब 60 लाख मतदाताओं को “अंडर एडजुडिकेशन” रखा गया है। इन मामलों की समीक्षा के लिए न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने पहले अधिकारियों से मिलने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर दोपहर करीब 4 बजे उन्होंने BDO कार्यालय का घेराव कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के दखल के बाद देर रात पुलिस टीम ने अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला, हालांकि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया।
यह मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “आपराधिक विफलता” करार दिया। अदालत ने कहा कि यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने की कोशिश है, बल्कि न्यायपालिका की अधिकारिता को भी चुनौती देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए और इस मामले की जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपी जाए। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और मालदा के जिला अधिकारी को 6 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा अदालत ने BDO कार्यालय में प्रवेश को सीमित करने और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के भी निर्देश दिए हैं। यह घटना चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में बढ़ते तनाव और ध्रुवीकरण को भी उजागर करती है।
