पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: कांग्रेस सभी 294 सीटों पर अकेले उतरेगी

West Bengal Assembly Elections: Congress will contest all 294 seats alone.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: कांग्रेस ने गुरुवार को आधिकारिक रूप से ऐलान किया कि वह इस वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि न तो वह CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के साथ और न ही तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के सीट-बंटवारे या गठबंधन में जाएगी।

यह फैसला गुरुवार को नई दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में लिया गया। बैठक में पश्चिम बंगाल से वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पांच बार के पूर्व लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी और राज्य से कांग्रेस के एकमात्र लोकसभा सांसद ईशा खान चौधरी मौजूद थे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई बैठक के बाद पार्टी के महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने घोषणा की कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने का निर्णय लिया है।

बैठक में खड़गे और मीर के अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता भी शामिल हुए।

गुलाम अहमद मीर ने कहा, “पश्चिम बंगाल में गठबंधन या सीट-बंटवारे के हमारे पिछले अनुभवों से जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता काफी कमजोर हुए। राज्य नेतृत्व सहित सभी से चर्चा के बाद यह तय किया गया है कि कांग्रेस सभी 294 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनावी तैयारियां शुरू की जाएंगी।”

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी, जो पहले CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के साथ गठबंधन के पक्षधर थे, ने कहा कि अकेले चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का है।

उन्होंने कहा, “इस बार हम पार्टी हाईकमान के फैसले के अनुसार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच सहज सीट-बंटवारे की संभावना पहले से ही कम थी। एक कोलकाता स्थित राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, “2016 से कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच सीट-बंटवारे के प्रमुख सूत्रधार दिवंगत CPI(M) महासचिव सीताराम येचुरी और अधीर रंजन चौधरी थे। येचुरी के निधन के बाद CPI(M) के केंद्रीय नेतृत्व में ऐसा कोई प्रभावशाली नेता नहीं बचा जो कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में जोरदार पैरवी कर सके। इसी तरह, कांग्रेस में भी अधीर रंजन चौधरी अब पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले दायरे में नहीं हैं।”

ऐसे में कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला राज्य की राजनीति में एक नए सियासी समीकरण की ओर इशारा करता है।

 

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