शिकायत अब कैसी ?

सोमा राजहंस

अपने अच्छे व्यवहार से प्यार से जब हम औरों का दिल जीत सकते हैं, तो उसे अपने अनुरूप भी बना सकते हैं. जरूरत है सिर्फ अपने आपको टटलोने की कि कहीं में ही तो कुछ खामियां नहीं। और तो और इन्हीं छोटी-छोटी बातों से झगडे होना आम बात है. लेकिन क्या आपने कभी आपने सोचा है कि आपकी किस बात पर उन्हें अक्सर गुस्सा आ जाता है. अगर इन पर गौर करें, तो यकीन मानिए उनसे आपके झगडे बंद हो जाएंगे.

मेरी नहीं हम सब की यही कहानी है. कितना पढ- लिख लिया है, पर गुस्सा कंटोल में नहीं रहता है.जाने-अनजाने जुबान फिसल ही जाती ंहै. भले ही मन में सामने वाले के लिए कुछ नहीं है. पर दिल को छलनी करने वाली बात जुबान पर क्यों आ जाती है. हमारी यही आदत रिश्तों के दिरमियान दूरियां ले आती है, जिन्हें फिर संजोना मुश्किल ही नहीं असंभतव होता है. हुआ यूं कि पडोस कि नई नवेली दुल्हन ओजल को पिछले कुछ दिनों से गंभीर हाव-भाव लिए देखा. हर दम खिलखिलाती, चंचल व मस्त-मौला ओजल को यूं गंभीर देखा नहीं गया. बहुत पूछने पर बताया कि उसकी हसबैंड से कोल्ड वार चल रही हैै. ताज्जुब हुआ कि प्यार में जीने-मरने की कसमों के बाद मां-बाप की रजामंदी व आशीर्वाद से वंचित इस कपल ने कोर्ट मैरिज की और आज महज तीन महीने की शादी टूटने की कगार पर आ खडी हुई है. उनके अटूट प्यार का यह अंजाम मेरे से देखा नहीं गया. ओजल का पति सें यूं रूठना और दो सप्ताह से बातचीत बंद देखी न गई. उसका दुख देखा नहीं जा रहा था. ऐसे में उसकी मुलाकात पडोस में रहने वाले फैमिली कांउसर व सुप्रीम कोर्ट के वकील सरफराज सिद्दिकी से करवाई, ताकि उसकी नई जिंदगी के आगाज में यूं गांठे नहीं आएं और प्यार की सौंधी महक से घर-आंगन ताउम्र महकता रहे. सरफराज जी कहते हैं तीर कमान से और बात जुबान से एक बार निकलने के बाद वापस नही आती, इसलिए कहा जाता है कि जो भी बोलो सोच-समझकर बोलो. असामान्य नहीं है पति-पत्नी के बीच तू-तू मैं-मैं. लडाई झगडा आम है. माना कि पति-पत्नी के प्यारे रिश्ते का ठोस बनाने के लिए कभी कभार की मीठी नोंक झोंक बहुत अहम है. लेकिन एक सीमा तक वरना रिश्ते में जहर घुलते देर नहीं लगती. कारण लडाई के बाद प्यार पति-पत्नी के रिश्ते को और मीठा कर देता है. पर इसे आदतन मैरिज लाइफ में शामिल करना अलगाव तलाक जैसी गंभीर स्थितियां तक रिश्ते में दूरियां ले आता है. कभंी आपने सोचा है कि झगडा होता क्यों हैं. इसकी मुख्य वजह क्या है. कभी-कभी तो आपको पता भी नहीं चलता कि आपने ऐसा कुछ बोला भी नहीं और वह नाराज हो गए. लेकिन सच तो यह है कि वास्तव में आपने अंजाने में ही सही, कुछ ऐसा बोल दिया जो उनके दिल को लग गई. ये गलतियां आपसे अक्सर होती हैं. जानते हैं कुछ बातें जिन पर चुप्पी लगानी आपके लिए उनके लिए जरूरी है. कारण शरीर पर लगे घाव भर जाते हैं, लेकिन दिल पर लगे घाव जीवन भर दर्द का अहसास देते रहते हैैं. रिश्ते में नारजगी की न हो इसके लिए तोल-मोल के नहीं कुछ बातों से दूरी बढानी नितांत आवश्यक हैं.

मेेरा बाॅयफ्रेंड मेरी गर्लफ्रेंड

याद रहे जो बीत गई सो बीत गई. पुरानी बातों पर चर्चा करने से रिश्तेे में खटास और नाराजगी ही हाथ आएगी. पार्टनर के दिल में बस चुके हैं या पार्टनर आपके दिल में बस चुका है. या यूं कहें कि आप दोनों एक दूजे के दिल की धडकनों को पहचानते हैं. ऐसे में आपकी या उनकी एक्स बाॅयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड पर चर्चा नाराजगी के सिवा कुछ और नहीं जाहिर करेग. इसके अलावा नई और पुरानी गर्लफें्रड/बाॅयफ्रेंड की तुलना भी रिश्ते में दरार ले आएगी. याद रहे वर्तमान आपके लिए कितना ही दिल अजीज क्यों न हो लेकिन भूत की खठठी-मीठी यादें आपका वर्तमान और भविष्य का अस्तित्व मिटा देंगी. यानी पुराने यारने पर भूलवश भी चर्चा नहीं करें.

मैजिक वर्ड्स

मानो शहद घुला है ‘आइ लव यू’ वाक्य में. कुछ पुराने दिन याद करते हैं. मिलने का समय शाम पांच बजे तय हुआ था और आप किसी कारणवश तय सीमा से चूक गए. ऐसे में उनका गुस्से लाल-पीला होना लाजिमी था. लाख समझाने के बावजूद गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. फिर क्या था जादुई वाक्य ने सब भुला दिया. आप आए और उनका हाथ हाथों में लिया और बोल दिया आई लव यू. बस फिर क्या था गुस्सा काफूर और प्यार में प्यार का इजाफा होता गया. न कोई सवाल न कोई जवाब. लेकिन ये लफ्ज आप ज्यों ही अपनी पत्नी से कहते हैं, बस सवालों की बौछार हो जाती है. आखिर क्यों? दरअसल, यह एक जादुई वाक्य है. परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, यह एक वाक्य ही काफी होता है, उसे ठीक करने के लिए. पर एक बात का ख्याल रखने की जरूरत है. जब आप यह बोलते हैं ‘आइ लव यू’, तो महिलाओं के भीतर भावनाओं का सागर उमड पडता है. जब आप उनसे ऐसा कुछ कहते हैं तो वह आपसे पलटकर सवाल करती हैं कि क्या वाकई आप शिद्दत से ऐसा महसूस करते हैं? इसके साथ ही कई और सवाल भी वे आपसे करेंगी, तो अगर ऐसे सवालों का सामना करने के लिए आप तैयार नहीं हैं, तो बेहतर होगा कि ऐसा कुछ न कहें. इसलिए बेहतर है आप ऐसा कुछ कहने की बजाय कुछ और कहकर उनका दिल जीतने की कोशिश करें.

दिल न मांगे मोर

अगर खाने के शौकीन आप हैं, तो वो भले क्यों नहीं हो सकतीं. माना छरहरा दिखने में वो काफी मेहनत करती हैं. लेकिन आपको बता दें कि नए स्वाद चखना लडकियों को बहुत लुभाता है. शादी से पहले या शादी के बाद आप दोनों डिनर के लिए होटल गए हैं. मेन्यू कार्ड से पार्टनर ने भारी-भरकम आर्डर दे दिया. जिसे देखते ही आप हैरान-परेशान हो गए. यह सब देख आप शांत रहिए. भूलकर भी उससे यह सवाल न करें कि क्या वाकई वह इतना सब खा सकोगी? वर्ना आपको नतीजा भुगतना पड सकता है. अच्छा होगा कि आप खानेपर कोई चर्चा ही न करें. गौरतलब है खाने-पीने को लेकर लडकियां काफी इमोशनल होती हैं. नए-नए स्वाद चखना एक तरह का जुनून होता है. खाने-पीने के बात पर टीका-टिप्पणी नाराजगी का आलम इतना बढ सकती है कि रिश्ते में चुप्पी पसर जाए. अगली आप दोनों टेबल पर हों तो उन पलों को एंज्वाए करें. साथ ही पार्टनर को नाराज नहीं करना चाहते तो खाने-पीने के लंबे आॅर्डर पर कोई सवाल नहीं करें.

आदत हो गई है तुम्हारी

कोई भी काम गलत हो या आपके कहे अनुसार न हो तो आप बिना कुछ सोचे यह बोल देते हैं कि आपकी ऐसी आदत हो गई है. भले ही सुनने में यह बात छोटी लगे, लेकिन यह बात चिंगारी की तरह आग को बढाती है. यही नहीं उनकी आदत का रोना रोकर आप उन्हें खुद को गलत साबित करने का मौका दे रहे हैं. और यहीं से छोटी सी बात तू-तू मैं-मैं फिर मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न कर देती है.

नो कंप्रीजन

गर्लफ्रेंड या पार्टनर की कभी उसकी मां या बहन से तुलना न करें. आप उन्हें उतना बेहतर नहीं जानते हैं, जितना कि वे जानती हैं. आप यह भी नहीं जानते कि दोनों के बीच वास्तव में कैसा रिश्ता है. इन सब बातों के अलावा,सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर शख्स अपनी एक अलग पहचान चाहता है, तो फिर उसकी तुलना किसी से क्यों की जाए.

टटोलिए स्वयं को

सिर्फ कटु आलोचना करके या दूसरों के सामने उपहास करके तो हम किसी को बदल नहीं सकते. उसके लिए आवश्यकता है कि हम सामने वाले की भी भावनाओं को समझें. अपने अच्छे व्यवहार से प्यार से जब हम औरों का दिल जीत सकते हैं तो पार्टनर को बहुत कुछ अपने अनुरूप भी बना सकते हैं. जरूरत है सिर्फ अपने आपको टटोलने की कि कहीं हम में ही तो कुछ खामियां नहीं. पति-पत्नी के संदर्भ में यह बात और भी प्रासंगिक है. हमारा सही सोचने का ढंग ही हमें सही दिशा में ले चलने के लिए सहायक होगा. फिर हमें औरों से शिकायत नहीं होगी.

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