मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की निकल गई हेकड़ी, भारत से ऋण राहत का किया आग्रह
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत विरोध में कुछ दिन पहले तक अकड़ दिखाने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हेकड़ी निकल गई। उन्होंने भारत को ‘निकटतम सहयोगी’ कहते हुए मालदीव में आसन्न आर्थिक संकट से उबारने के लिए ऋण राहत का आग्रह किया।
इससे पहले मुइज्जू ने 21 अप्रैल को आम चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से मालदीव में वर्तमान आर्थिक संकट के लिए पिछली भारत समर्थक इब्राहिम सोलिह सरकार को दोषी ठहराया था। उनका सारा चुनावी कैम्पेन भारत विरोध पर टीका था। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारत विरोध में कई टिप्पणियाँ की और भारतीय सेना को मालदीव से जाने का फरमान सुना दिया।
अब अपनी भारत विरोधी छवि से किनारा करते हुए मालदीव के राष्ट्रपति ने मोदी सरकार से औपचारिक रूप से संपर्क किए बिना ही भारत से कर्ज राहत की मांग की है।
भारत से ऋण राहत की मांग करते हुए मीडिया को दिया गया मुइज्जू का बयान काफी दिलचस्प है। भारतीय एक्जिम बैंक का भुगतान अगले साल ही शुरू होगा। माले पर चीन का लगभग 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर और भारत का लगभग 380 मिलियन अमेरिकी डॉलर बकाया है, लेकिन सबसे बड़ा संकट 2026 में सॉवरेन बांड धारकों को एक बिलियन अमेरिकी डॉलर का पुनर्भुगतान होगा।
मुइज्जू के बयान से संकेत मिलता है कि मालदीव को धीरे-धीरे यह एहसास हो गया है कि भारत के अलावा कोई भी देश माले को बिना किसी गारंटी के वित्तीय सहायता नहीं देगा, यहां तक कि नकदी से समृद्ध चीन भी नहीं। इसी तरह, श्रीलंका में भी स्थिति बनी थी जब 2022 की वित्तीय और राजनीतिक अराजकता के दौरान केवल भारत ही उसके समर्थन में आया।
मीडिया में मुइज़ू की टिप्पणियाँ इस तथ्य को भी उजागर करती हैं कि भारतीय उच्च श्रेणी के पर्यटकों ने मालदीव जाना बंद कर दिया है, गेस्ट हाउस में आने वाले चीनी पर्यटक अब नंबर 1 स्थान पर हैं और भारतीय नंबर 6 स्थान पर जा रहे हैं। अपुष्ट रिपोर्टों से पता चलता है कि भारतीय पर्यटकों की सेवा करने वाले हाई-एंड रिसॉर्ट्स को पहले तीन महीनों में राजस्व में लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है।
मालदीव की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि माले 2026 में ऋण डिफ़ॉल्ट की ओर बढ़ रहा है। और भारत के खिलाफ मुइज्जू की रणनीति का उल्टा असर हुआ है।
