भारत-पाक संघर्ष में मध्यस्थता के चीन के दावे पर नई दिल्ली सरकार का सख्त विरोध
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: चीन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच इस साल हुए सैन्य संघर्ष में मध्यस्थता का श्रेय लेने का दावा किया है। हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए दोहराया है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच किसी भी तरह की तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।
बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन की विदेश नीति पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस साल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे अधिक स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष देखने को मिले। उन्होंने दावा किया कि चीन ने “निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ रुख” अपनाते हुए कई वैश्विक हॉटस्पॉट्स में शांति स्थापना में भूमिका निभाई।
वांग यी ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन ने इस वर्ष “भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव”, उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष और कंबोडिया-थाईलैंड विवाद जैसे मामलों में मध्यस्थता की।
भारत का सख्त खंडन
चीन के इस दावे पर भारत ने पहले ही कड़ा रुख अपनाया हुआ है। विदेश मंत्रालय ने 13 मई की प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई के सैन्य तनाव के बाद बनी सहमति पूरी तरह से दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधे संवाद का नतीजा थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 10 मई 2025 को दोपहर 3:35 बजे दोनों देशों के DGMOs के बीच हुई फोन बातचीत में ही तारीख, समय और शर्तें तय हुई थीं। भारत ने दोहराया कि भारत-पाक संबंधों से जुड़े किसी भी मुद्दे में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका
7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की भूमिका पर भी सवाल उठे। भारत ने आरोप लगाया कि चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान की और इस संघर्ष को एक “लाइव लैब” की तरह इस्तेमाल किया। पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं में चीन की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है।
चीन ने 7 मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने की अपील की थी और भारत की एयरस्ट्राइक पर “खेद” जताया था। हालांकि, भारत में इस बयान को पाकिस्तान के पक्ष में झुका हुआ माना गया। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने आरोप लगाया कि चीन ने अपनी प्राचीन “36 रणनीतियों” के तहत पाकिस्तान को आगे कर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
भारत-चीन संबंधों पर वांग यी का बयान
अपने भाषण में वांग यी ने भारत-चीन संबंधों में सुधार की बात भी कही। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक गति देखने को मिली।
हालांकि, भारत-पाक संघर्ष में मध्यस्थता के चीन के दावे ने एक बार फिर नई दिल्ली और बीजिंग के बीच विश्वास की कमी को उजागर कर दिया है।
