भारत और यूरोपियन यूनियन एक दूसरे को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा देंगे
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के मसौदे के अनुसार, दोनों पक्ष समझौता लागू होने की तारीख से पांच वर्षों तक एक-दूसरे को “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (एमएफएन) का दर्जा देंगे। मसौदा 27 फरवरी को जारी किया गया।
भारत और ब्रसेल्स के बीच बातचीत वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन बाज़ार पहुंच और नियामक मानकों को लेकर मतभेदों के कारण 2013 में वार्ता स्थगित हो गई थी। इसके बाद जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू हुई। यह व्यापार समझौता नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय नेताओं, जिनमें उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा एंटोनियो कोस्टा शामिल थे, के बीच उच्चस्तरीय चर्चा के बाद घोषित किया गया।
एमएफएन प्रावधान का अर्थ है कि भारत या यूरोपीय संघ, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के किसी अन्य सदस्य देश को अधिक रियायती टैरिफ नहीं दे सकेंगे, जब तक कि वही रियायत एक-दूसरे को भी न दी जाए। यह प्रतिबद्धता व्यापक भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते का हिस्सा है, जिसकी वार्ता 27 जनवरी को लगभग दो दशकों बाद पूरी हुई। समझौता दोनों पक्षों द्वारा अनुमोदन के बाद कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते की प्रमुख बातें
प्रस्तावित एफटीए के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने की उम्मीद है। वहीं यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों और वाइन जैसे उत्पादों पर भारत में शुल्क में कमी की जाएगी, जिससे वे भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें। हालांकि डेयरी, चावल, चीनी और बीफ जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को टैरिफ उदारीकरण से बाहर रखा गया है।
मसौदे में खाद्य सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने, प्रमाणन और ऑडिट प्रक्रियाओं को सरल करने का प्रस्ताव है। कस्टम सहयोग को भी अहम स्तंभ बनाया गया है, जिसमें सामान की तेज क्लीयरेंस, दस्तावेजी प्रक्रियाओं का सरलीकरण और आयात-निर्यात से जुड़े निर्णयों के लिए निष्पक्ष अपील व्यवस्था शामिल है। समझौता लागू होने के एक वर्ष बाद से वार्षिक आयात आंकड़े साझा किए जाएंगे, ताकि टैरिफ रियायतों के उपयोग और पारदर्शिता की निगरानी हो सके।
डिजिटल क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने ऑनलाइन व्यापार में अनावश्यक बाधाओं को कम करने और सुरक्षित व खुले डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। इससे सीमा-पार ई-कॉमर्स और डेटा आधारित व्यापार को सुविधा मिलने की उम्मीद है, जबकि नियामकीय स्वायत्तता भी बनी रहेगी।
विवाद निपटान के लिए मध्यस्थता तंत्र
एफटीए के मसौदे में व्यापारिक विवादों के समाधान के लिए एक संरचित मध्यस्थता प्रक्रिया का भी प्रावधान है। यदि किसी पक्ष को लगता है कि दूसरे पक्ष की कोई नीति द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित कर रही है, तो वह मध्यस्थता का अनुरोध कर सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया दोनों पक्षों की आपसी सहमति से ही शुरू होगी।
