बांग्लादेश: यूनुस सरकार में जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 197 अल्पसंख्यकों की मौत

Bangladesh: 197 members of minority communities died under the Yunus government between January and December 2025.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: बांग्लादेश के एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने देशभर में हो रहे गंभीर और व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों पर गहरी चिंता जताई है। इनमें भीड़ हिंसा, न्यायेतर हत्याएं, हिरासत में मौतें, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, राजनीतिक हिंसा और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले शामिल हैं। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (ASK) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान देश में “भीड़ आतंकवाद” में चिंताजनक स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भीड़ हिंसा में 197 लोगों की मौत हुई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 128 था।

ASK के मुताबिक, 2024 में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक भीड़ हिंसा में कम से कम 293 लोगों की जान जा चुकी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अफवाहों और संदेह के आधार पर, बिना किसी सबूत, जांच या कानूनी प्रक्रिया के लोगों को पीटा गया और मार दिया गया। कई मामलों में धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर भीड़ को उकसाया गया। तथाकथित ‘तौहीद जनता’ के नाम पर कला और सांस्कृतिक केंद्रों में तोड़फोड़, बाउल समुदाय पर हमले और यहां तक कि कब्रों से शव निकालकर जलाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।

बांग्लादेशी दैनिक प्रोथोम आलो ने ASK के हवाले से बताया कि असहमति रखने वालों, यहां तक कि स्वतंत्रता सेनानियों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अधिकांश मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियां कार्रवाई करने में विफल रहीं और दोषियों को सज़ा दिलाने के प्रयास लगभग न के बराबर रहे।

हिरासत और जेलों में मौतें

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश की विभिन्न जेलों में कम से कम 107 लोगों की मौत हुई, जिनमें 69 कैदी और 38 बंदी शामिल हैं। इनमें सबसे ज़्यादा 38 मौतें ढाका सेंट्रल जेल में दर्ज की गईं, जबकि गाज़ीपुर जेल में 7 मौतें हुईं। शेष मौतें देश के अन्य हिस्सों की जेलों में हुईं।

इसके अलावा, ASK की सूचना संरक्षण इकाई के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में कम से कम 38 लोगों की मौत गैर-न्यायिक हत्याओं में हुई। इनमें से कई मौतें कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में, कथित यातना, या तथाकथित ‘शूटआउट’ और ‘गनफाइट’ के नाम पर हुईं, जो देश में गंभीर मानवाधिकार संकट को दर्शाती हैं।

राजनीतिक हिंसा और मीडिया पर हमले

ASK की रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की 401 घटनाएं हुईं, जिनमें 102 लोगों की मौत और 4,744 लोग घायल हुए।

इसी अवधि में 381 पत्रकारों को उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ा। इनमें 23 पत्रकारों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा निशाना बनाया गया, जबकि 20 पत्रकारों को जान से मारने की धमकियां दी गईं, जिससे देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं पर बढ़ते हमले

रिपोर्ट में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों को भी उजागर किया गया है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच हमले, धमकियां, लूटपाट, आगजनी और मूर्तियों की तोड़फोड़ की कई घटनाएं दर्ज की गईं।

ASK के अनुसार, अकेले 2025 में हिंदुओं को निशाना बनाकर कम से कम 42 हमले हुए। इन घटनाओं में 33 घरों को नुकसान, 36 घरों में आगजनी, चार मंदिरों पर हमले, 64 मूर्तियों की तोड़फोड़ और भूमि हड़पने की नौ घटनाएं सामने आईं।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघनों और अल्पसंख्यकों—विशेषकर हिंदू समुदाय—पर हमलों में लगातार इज़ाफ़ा हुआ है, जो देश की कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

 

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