प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं, ‘भारत की विदेश नीति को नई मजबूती देने में निभा रहे हैं अहम भूमिका’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में प्रधानमंत्री ने देश के लिए जयशंकर के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक प्रतिष्ठित राजनयिक के रूप में राष्ट्र की सेवा की है और वर्तमान में भारत की विदेश नीति तथा वैश्विक संबंधों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “डॉ. एस. जयशंकर जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उन्होंने एक विशिष्ट राजनयिक के रूप में देश की सेवा की है और अब भारत की विदेश नीति और विश्व के साथ संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनके दीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर का जन्म 9 जनवरी 1955 को नई दिल्ली में हुआ था। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और भारत के वर्तमान विदेश मंत्री हैं। वर्ष 2019 से इस पद पर कार्यरत जयशंकर को सक्रिय राजनीति में आने वाले सबसे अनुभवी राजनयिकों में गिना जाता है। वे भारत के पहले ऐसे करियर डिप्लोमैट और पूर्व विदेश सचिव हैं, जिन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया गया।
राजनीति में आने से पहले जयशंकर का राजनयिक करियर चार दशकों से अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने 2015 से 2018 तक भारत के विदेश सचिव के रूप में कार्य किया, जो विदेश मंत्रालय का सर्वोच्च नौकरशाही पद है। इससे पहले वे चीन में भारत के राजदूत (2009–2013) और अमेरिका में भारत के राजदूत (2013–2015) रह चुके हैं।
जयशंकर का जन्म एक प्रतिष्ठित तमिल परिवार में हुआ। उनके पिता के. सुब्रह्मण्यम देश के जाने-माने रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, वरिष्ठ नौकरशाह और रक्षा एवं परमाणु नीति के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे। इसी बौद्धिक और रणनीतिक माहौल में पले-बढ़े जयशंकर की रुचि कम उम्र से ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक राजनीति में विकसित हुई।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली और बेंगलुरु से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से राजनीति विज्ञान में परास्नातक, एम.फिल. और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनकी अकादमिक विशेषज्ञता परमाणु कूटनीति रही है। वे 1977 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुए।
जयशंकर ने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत 1978 में मॉस्को से की, जहां उन्होंने रूसी भाषा में दक्षता हासिल की, जो बाद में भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने में उपयोगी साबित हुई। 1979 से 2006 के बीच उन्होंने मॉस्को, वॉशिंगटन डीसी, कोलंबो, बुडापेस्ट और टोक्यो सहित कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दायित्व संभाले।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के प्रेस सचिव और भाषण लेखक के रूप में भी कार्य किया, जिससे उन्हें शासन, संचार और राजकीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ मिली।
वर्ष 2004 में भारत लौटने के बाद उन्हें विदेश मंत्रालय में अमेरिका प्रभाग का प्रमुख नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने 2005 में हुए ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ताओं में अहम भूमिका निभाई, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति को नई पहचान मिली।
2007 से 2009 तक जयशंकर भारत के सिंगापुर में उच्चायुक्त रहे। 2009 में उन्हें चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया, जहां वे 2013 तक रहे और बीजिंग में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय राजदूत बने। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-चीन संबंधों में कई संवेदनशील मुद्दे सामने आए।
2012 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपने नक्शे में दर्शाने वाले पासपोर्ट जारी किए जाने पर, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने चीनी नागरिकों को भारत के नक्शे वाले वीज़ा जारी कर कड़ा कूटनीतिक संदेश दिया।
2013 में वे अमेरिका में भारत के राजदूत बने, जब दोनों देशों के संबंध एक भारतीय राजनयिक की गिरफ्तारी के कारण तनावपूर्ण थे। जयशंकर ने उच्चस्तरीय संवाद के जरिए हालात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
28 जनवरी 2015 को उन्हें भारत का विदेश सचिव नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। 2015 के नेपाल भूकंप के समय भारत की त्वरित मानवीय सहायता का समन्वय भी उन्होंने किया।
2018 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कुछ समय निजी क्षेत्र में काम किया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह पर राजनीति में प्रवेश किया। मई 2019 में उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री नियुक्त किया गया और जुलाई 2019 में वे गुजरात से राज्यसभा के सदस्य चुने गए।
विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत 75 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने ‘वंदे भारत मिशन’ का नेतृत्व भी किया, जिसके तहत लाखों भारतीयों को विदेशों से सुरक्षित वापस लाया गया।
जून 2024 में प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में उन्हें फिर से विदेश मंत्री बनाया गया। वर्तमान में वे भारत की विदेश नीति के प्रमुख शिल्पकारों में से एक हैं और वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त आवाज बने हुए हैं।
