कोलकाता I-PAC छापेमारी विवाद: ED ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य अधिकारियों के खिलाफ दूसरी रिट याचिका दायर
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली/कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दूसरी रिट याचिका दायर की, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस अधिकारियों पर 8 दिसंबर को कोलकाता में I-PAC कार्यालय और इसके डायरेक्टर के घर पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को “गलत तरीके से रोके जाने” का आरोप लगाया गया है।
याचिका ED के असिस्टेंट डायरेक्टर निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडीला की ओर से दायर की गई है। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा, और डिप्टी कमिश्नर प्रियब्रतो रॉय को प्रतिवादी बनाया गया है।
ED का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 8 दिसंबर को सुबह 6:20 बजे शुरू हुई तलाशी के दौरान, जब ED अधिकारी दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त कर रहे थे, तो मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों ने अवैध रूप से परिसर में प्रवेश किया और तलाशी कर रहे अधिकारियों को रोक दिया।
ED के अनुसार, अधिकारियों ने उनके लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए, साथ ही फाइलों से भरा ट्रंक भी ले गए। याचिका में लिखा गया है, “लैपटॉप लेना और इसे दो घंटे तक कब्ज़े में रखना भी चोरी के बराबर है। तलाशी की कार्रवाई के दौरान लगभग दोपहर 12:40 बजे राज्य अधिकारियों ने ED द्वारा इकट्ठा किए गए दस्तावेज़, कंप्यूटर सिस्टम और ईमेल बैकअप को रोक दिया। परिसर में लगे सुरक्षा कैमरों का स्टोरेज डिवाइस और कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी उनके कब्ज़े में ले लिए गए। परिणामस्वरूप, ED की टीम कोई डेटा बैकअप नहीं कर सकी।”
कोलकाता में तलाशी अभियान के दौरान हाई-वोल्टेज टकराव हुआ था और राज्य पुलिस ने ED के खिलाफ चार मामले दर्ज किए थे। ED ने इन मामलों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
मामला और पृष्ठभूमि
ED ने यह कार्रवाई 2020 में CBI द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की थी। यह मामला अनूप माझी उर्फ़ “लाला” के नेतृत्व वाले कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा है। आरोप है कि इस सिंडिकेट ने पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में आसनसोल और ईस्टर्न कोलफील्ड लीज वाले इलाकों से कोयला अवैध रूप से निकाला और बेच दिया।
इस जांच के तहत ED ने कुल 10 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिनमें छह पश्चिम बंगाल और चार दिल्ली में थे।
ED की याचिका में अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि राज्य अधिकारियों द्वारा तलाशी कार्य में बाधा डालने और दस्तावेज़ व डिजिटल डिवाइस जब्त करने की कार्रवाई को रोका जा सके।
