धर्मेंद्र के निधन के बाद अलग-अलग प्रेयर मीट को लेकर उठी अटकलों पर हेमा मालिनी ने तोड़ी चुप्पी
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार की आपसी समीकरणों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 24 नवंबर को मुंबई स्थित उनके आवास पर धर्मेंद्र का निधन हुआ था। इसके तीन दिन बाद सनी देओल और बॉबी देओल ने मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में प्रेयर मीट का आयोजन किया। हालांकि, इस प्रेयर मीट में धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी और उनकी बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल शामिल नहीं हुईं।
इसी दिन हेमा मालिनी ने अपने घर पर गीता पाठ का आयोजन किया। इसके करीब दो हफ्ते बाद उन्होंने दिल्ली में एक अलग प्रेयर मीट भी रखी। अलग-अलग प्रेयर मीट्स को लेकर फैंस के बीच कयास लगाए जाने लगे और कथित पारिवारिक मतभेदों की अटकलें शुरू हो गईं।
अब इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमा मालिनी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में साफ कहा कि परिवार के बीच सब कुछ पहले की तरह ही अच्छा और सौहार्दपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हमेशा से हमारे रिश्ते बहुत अच्छे और cordial रहे हैं। आज भी वैसे ही हैं। मुझे नहीं पता लोग क्यों सोचते हैं कि हमारे बीच कुछ गलत है। लोगों को गॉसिप चाहिए। क्या मुझे हर बात का जवाब देना जरूरी है? यह मेरी निजी जिंदगी है। हम बिल्कुल खुश हैं और एक-दूसरे के बहुत करीब हैं।”
हेमा मालिनी ने आगे कहा, “लोग न जाने कैसी-कैसी कहानियां बना रहे हैं। यह दुखद है कि कुछ लोग दूसरों के दुख का इस्तेमाल कुछ आर्टिकल लिखने के लिए करते हैं। यही वजह है कि मैं इन अटकलों का जवाब नहीं देती।”
इससे पहले टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में भी हेमा मालिनी ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा, “यह हमारे घर का पर्सनल मामला है। हमने आपस में बात की है। मैंने अपने घर पर प्रेयर मीट इसलिए रखी क्योंकि मेरे लोगों का ग्रुप अलग है। दिल्ली में प्रेयर मीट इसलिए रखी क्योंकि मैं राजनीति में हूं और वहां मेरे राजनीतिक मित्र हैं। मथुरा मेरी लोकसभा सीट है और वहां के लोग धर्मेंद्र जी को बहुत चाहते थे, इसलिए वहां भी प्रेयर मीट रखी। मुझे जो सही लगा, मैंने वही किया और मैं इससे खुश हूं।”
हेमा मालिनी के इस बयान के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि देओल परिवार में किसी तरह की दरार नहीं है और अलग-अलग प्रेयर मीट्स के पीछे केवल परिस्थितियां और व्यक्तिगत जिम्मेदारियां थीं, न कि कोई पारिवारिक विवाद।
