हेट स्पीच मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत: 2021 से लंबित अधिकांश याचिकाएं बंद होंगी

Supreme Court gives a strong indication on hate speech cases: Most petitions pending since 2021 will be closedचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह हेट स्पीच से जुड़े उन अधिकांश मामलों को बंद कर सकता है, जो वर्ष 2021 से लंबित हैं और जिनमें अदालत ने पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का काफी हद तक पालन किया जा चुका है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस संबंध में दाखिल कई रिट याचिकाओं के एक बैच पर आदेश सुरक्षित रख लिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के लिए कानून के तहत अन्य वैकल्पिक उपाय खुले रहेंगे।

नोएडा मौलवी मामले की सुनवाई फरवरी में

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में नोएडा में एक मुस्लिम मौलवी के खिलाफ कथित हेट क्राइम से जुड़े मामले की सुनवाई फरवरी में तय की है। अदालत इस सुनवाई में यह जानना चाहती है कि मामले का ट्रायल किस स्तर पर पहुंचा है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रुचिरा गोयल ने अदालत को बताया कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और जांच में यह निष्कर्ष निकला है कि यह हेट क्राइम नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक लुटेरों के गिरोह का मामला था, जो लोगों को कार में लिफ्ट देने के बहाने लूटपाट करता था।

इस पर मौलवी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शाहरुख आलम ने यूपी सरकार के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार इस घटना को सामान्य अपराध के रूप में पेश कर रही है और हेट क्राइम की संभावना को स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने अदालत से इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि 28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2022 के आदेश के दायरे का विस्तार करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे हेट स्पीच के मामलों में, शिकायत मिलने का इंतजार किए बिना, स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करें।

अदालत ने हेट स्पीच को “एक गंभीर अपराध” करार देते हुए कहा था कि यह देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसका 21 अक्टूबर 2022 का आदेश धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा। अदालत ने चेतावनी दी थी कि हेट स्पीच के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में किसी भी तरह की देरी को कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

2022 में यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली को मिले थे सख्त निर्देश

संविधान में निहित भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को रेखांकित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सरकारों को निर्देश दिया था कि वे हेट स्पीच देने वालों के खिलाफ शिकायत का इंतजार किए बिना तत्काल आपराधिक मामले दर्ज करें।

अदालत ने इस मुद्दे को “बेहद गंभीर” बताते हुए कहा था कि प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की ढिलाई या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा।

यह पूरा मामला पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। शुरुआत में उन्होंने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के खिलाफ हेट स्पीच देने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश की मांग की थी। बाद में, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 21 अक्टूबर 2022 के आदेश को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने की मांग करते हुए एक अतिरिक्त आवेदन भी दाखिल किया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा रुख से संकेत मिलता है कि वह पुराने लंबित मामलों को समेटते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा देने की तैयारी में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *