बंगाल SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज ममता बनर्जी की चुनौती पर सुनवाई

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट आज सोमवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दायर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग (ECI) का जवाब सुनेगा। ममता बनर्जी ने इस याचिका में राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को चुनौती दी है।
पिछले सप्ताह एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भावुक अंदाज़ में, हाथ जोड़कर उन्होंने शीर्ष अदालत से “लोकतंत्र बचाने” की अपील की थी।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि लगभग 1.36 करोड़ मतदाताओं को “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट” में डाल दिया गया है, जिनके नाम केवल तकनीकी कारणों जैसे उपनाम की गलत वर्तनी, या शादी के बाद महिलाओं का पता बदलने के चलते हटाए जाने के खतरे में हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त 8,300 माइक्रो-ऑब्ज़र्वर, जिन्हें उन्होंने केंद्र सरकार के अधिकारी बताया, बिना किसी संवैधानिक अधिकार के मतदाता सूची से नाम हटा रहे हैं।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि 2025 की मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर ही पश्चिम बंगाल के अगले विधानसभा चुनाव कराए जाएं, न कि SIR के बाद तैयार की जा रही नई सूची पर, क्योंकि इससे लाखों वैध मतदाता बाहर हो सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, और चुनाव आयोग से मांग की कि 1.4 करोड़ विवादित मतदाताओं के नाम ऑनलाइन, सर्चेबल फॉर्मेट में सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि आधार कार्ड को पहचान के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बल्क फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए “गुप्त रूप से बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाए जा रहे हैं” और इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा था, जिस पर आज सुनवाई होनी है। इसी दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने ममता बनर्जी से आग्रह किया था कि वे स्वयं के बजाय अपने वकील श्याम दीवान को बहस करने दें।
इधर, ममता सरकार को आज अदालत में कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सनातनी संसद द्वारा दायर एक अन्य जनहित याचिका (PIL) पर भी सुनवाई करेगा। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के अधिकारी लोकतांत्रिक कर्तव्यों का पालन करते समय जान से मारने की धमकियों का सामना कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया था कि इस याचिका को भी ममता बनर्जी की याचिका के साथ ही सुना जाए, क्योंकि केंद्र सरकार भी इस मामले में पक्षकार है।
सॉलिसिटर जनरल ने चुनाव आयोग द्वारा पहले दायर हलफनामों का हवाला देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया में लगे कई अधिकारी हिंसक घटनाओं और सुरक्षा खतरों के कारण अपनी ड्यूटी छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
चुनाव आयोग ने अपने एक हलफनामे में ममता बनर्जी पर “उकसाने वाले बयान” देने का भी आरोप लगाया है।
28 जनवरी को दायर नवीनतम हलफनामे में आयोग ने अदालत से अनुरोध किया कि पंचायत भवनों के बजाय सुरक्षित स्थानों पर सुनवाई की अनुमति दी जाए, क्योंकि कई जगहों पर तोड़फोड़ और शारीरिक हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि इटहार, फरक्का और चाकुलिया जैसे इलाकों में SIR सुनवाई के दौरान चुनाव अधिकारियों पर हिंसक हमले हुए।
आज की सुनवाई में जहां सुप्रीम कोर्ट ममता बनर्जी के मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब सुनेगा, वहीं आयोग द्वारा उठाए गए सुरक्षा संबंधी गंभीर आरोपों पर भी विचार करेगा।
साथ ही, चुनाव आयोग को अदालत को यह भी आश्वस्त करना होगा कि 1.4 करोड़ नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।
