कच्छ की शांति में खोए सनी देओल, शेयर किया सुकून भरा पल
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान एक शांत और आत्ममंथन से भरा पल सोशल मीडिया पर साझा किया है। सनी ने इंस्टाग्राम पर कच्छ से एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह अपनी कार के सहारे खड़े नजर आ रहे हैं और सामने फैले पानी व आसमान के खूबसूरत नज़ारे को निहारते दिखते हैं। सुबह या शाम के हल्के रंगों में घुला आसमान वीडियो को और भी सुकूनभरा बना रहा है।
इस वीडियो को सनी देओल ने कैप्शन दिया, “Road to heaven. Kutch”, जो उस जगह की शांति और ठहराव को बखूबी दर्शाता है। यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब अभिनेता अपनी हालिया रिलीज़ फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं।
‘बॉर्डर 2’ 1971 के भारत-पाक युद्ध और वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। फिल्म को गुलशन कुमार और टी-सीरीज़ ने जे.पी. दत्ता की जे.पी. फिल्म्स के सहयोग से प्रस्तुत किया है। इसका निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे.पी. दत्ता और निधि दत्ता ने किया है, जबकि निर्देशन की कमान अनुराग सिंह ने संभाली है।
गौरतलब है कि जे.पी. दत्ता की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ साल 1997 में रिलीज़ हुई थी, जिसमें सनी देओल के साथ जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी और कुलभूषण खरबंदा अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। वहीं, तबू, पूजा भट्ट, राखी गुलज़ार, शरबानी मुखर्जी, सपना बेदी और राजीव गोस्वामी भी फिल्म का हिस्सा थे।
आने वाले समय में सनी देओल फिल्म ‘लाहौर 1947’ में नजर आएंगे, जो 13 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। इस फिल्म के जरिए सनी देओल, निर्देशक राजकुमार संतोषी और निर्माता आमिर खान पहली बार साथ काम कर रहे हैं।
फिल्म को लेकर आमिर खान ने एक बयान में कहा, “यह धरमजी की पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी और मुझे बेहद खुशी है कि वह इस फिल्म को देख सके।”
‘लाहौर 1947’ में सनी देओल के साथ शबाना आज़मी, प्रीति ज़िंटा और करण देओल भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने दिया है और गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
यह फिल्म 1947 के भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो उपमहाद्वीप के इतिहास के सबसे उथल-पुथल भरे अध्यायों में से एक रहा है। यह सनी देओल और राजकुमार संतोषी की फिर से जोड़ी है, जो इससे पहले ‘घायल’ और ‘दामिनी’ जैसी यादगार फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं।
फिल्म की कहानी असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या, ओ जम्याइ नइ’ से प्रेरित बताई जा रही है। यह कहानी बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बजाय उन मानवीय रिश्तों पर केंद्रित है, जो सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन के दौरान टूट जाते हैं। कहानी एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लाहौर से भारत आकर एक हवेली में बसता है, जहां अब भी एक बुज़ुर्ग मुस्लिम महिला रह रही होती है। इसके बाद पहचान, पीड़ा, सह-अस्तित्व और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़े सवालों की गहरी और भावनात्मक पड़ताल होती है।
