चुनाव आयोग ने बंगाल सरकार को 17 फरवरी तक चुनाव अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केन्द्रीय चुनाव आयोन ने पश्चिम बंगाल सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में फर्जी नाम शामिल किए जाने के आरोपों में संलिप्त चार निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए 17 फरवरी तक की समय-सीमा तय की है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल कार्यालय के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, इस संबंध में आयोग ने शनिवार शाम राज्य सचिवालय को एक ताजा पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि निर्धारित तिथि तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि बार-बार याद दिलाने के बावजूद राज्य सरकार ने एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई।
जिन चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) देबोत्तम दत्ता चौधरी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) तथागत मंडल शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मेदिनीपुर जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ बिप्लब सरकार और एईआरओ सुदीप्त दास के नाम भी इस सूची में हैं।
उल्लेखनीय है कि अगस्त 2025 में आयोग मुख्यालय, नई दिल्ली ने इन चारों अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने केवल आंशिक रूप से आदेश का पालन करते हुए अधिकारियों को निलंबित कर दिया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। साथ ही एक संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर को भी कार्यमुक्त किया गया था।
जनवरी में आयोग ने दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारियों को फिर से निर्देश दिया था कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। इन अधिकारियों पर मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़ और फर्जी नाम जोड़ने का आरोप है।
इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आयोग के निर्देशों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि आयोग “भाजपा का बंधुआ मजदूर” की तरह काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई नहीं करेगी।
अब 17 फरवरी की समय-सीमा के मद्देनजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
