AI को क्या सही करना है, इसके लिए भारत एक मुश्किल बेंचमार्क है: सर्वम AI के प्रत्यूष कुमार

India is a difficult benchmark for what AI needs to get right: Pratyush Kumar of Sarvam AIचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: Sarvam AI के सीईओ और सह-संस्थापक प्रत्यूष कुमार ने कहा है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए दुनिया का सबसे कठिन लेकिन सबसे अहम परीक्षण क्षेत्र बन सकता है। एनडीटीवी इंड.एआई समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या, भाषाई विविधता और सामाजिक जटिलता इसे एआई के लिए “बेहद कठिन बेंचमार्क” बनाती है।

कुमार ने कहा कि एआई में “वैल्यू लूप” यानी यूज़र फीडबैक के जरिए मॉडल को बेहतर बनाने की प्रक्रिया अब वर्षों के बजाय महीनों में परिणाम देने लगी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक को बड़े पैमाने पर वास्तविक दुनिया में लागू करना जरूरी है, ताकि लगातार मिले फीडबैक से मॉडल को मजबूत बनाया जा सके।

भारतीय भाषाओं पर फोकस

सर्वम एआई भारतीय भाषाओं के लिए अपने स्वदेशी एआई स्टैक को ऑप्टिमाइज़ कर रहा है। कुमार का दावा है कि कंपनी इस क्षेत्र में “विश्व स्तर” का प्रदर्शन कर रही है।

कंपनी के विज़न मॉडल ने olmOCR बेंच पर लगभग 84.3% सटीकता हासिल की, जो Gemini 3 Pro (करीब 80.2%) और ChatGPT Vision (लगभग 69–70%) से बेहतर है।

OmniDocBench v1.5 पर सर्वम विज़न ने 93.28% सटीकता दर्ज की। वर्ड एक्युरेसी टेस्ट में भी इसने 87.36% स्कोर किया, जबकि जेमिनी 3 प्रो 82.51% पर रहा।

एआई स्मार्ट ग्लास लॉन्च की तैयारी

कंपनी ने इस सप्ताह एआई-संचालित स्मार्ट ग्लास भी पेश किए हैं, जिन्हें मई में बाजार में उतारा जाएगा। एक वायरल तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वम के स्टॉल पर इस डिवाइस को आज़माते देखा गया। कुमार के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सुरक्षा रेखा पार कर उत्पादों को करीब से देखा और प्रदर्शन से जुड़े सवाल पूछे, जिनमें यह भी शामिल था कि क्या सिस्टम गुजराती भाषा बोल सकता है।

फीचर फोन पर भी एआई

सर्वम ने ऐसे मॉडल भी प्रदर्शित किए जो फोटो से टेक्स्ट निकाल सकते हैं, भाषण पहचान सकते हैं और साधारण फीचर फोन कॉल के जरिए जवाब तैयार कर सकते हैं, वह भी बिना महंगे हार्डवेयर के।

कुमार ने कहा कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक प्राचीन सभ्यता होने के नाते भारत एआई की दौड़ से बाहर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, “भारत को इसे खुद बनाना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने माना कि पूंजी निवेश और शोध की उच्च मांग इस दिशा में बड़ी चुनौती है, जिसे देश में ही हल करना होगा।

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