एआई युग में प्लेटफॉर्म गवर्नेंस की चुनौतियों पर चर्चा के लिए ग्लोबल साउथ विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया एसएफएलसी.इन

SFLC.in brings together Global South experts to discuss the challenges of platform governance in the AI ​​eraचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: एसएफएलसी.इन (SFLC.in) ने मानवाधिकार, प्रौद्योगिकी नीति और इंटरनेट शासन के क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटेन की संस्था ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जेनरेटिव एआई की तीव्र वृद्धि से उत्पन्न विनियमन, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक बहस के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श किया।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित इस बैठक में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें कानून निर्माता, नीति-निर्माता, नागरिक समाज के नेता, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता तथा प्रौद्योगिकी शासन विशेषज्ञ शामिल थे। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्लेटफॉर्म शासन से संबंधित नई चुनौतियों पर चर्चा के लिए एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों से एकत्र हुए थे।

प्रारंभिक चर्चाओं में यह सामने आया कि कई प्लेटफ़ॉर्म शासन नियम ग्लोबल साउथ की परिस्थितियों से अलग बनाए गए हैं और वे स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों, भाषाई विविधता तथा सीमित संस्थागत क्षमता के अनुरूप पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। जैसे-जैसे जेनरेटिव और एजेंट-आधारित एआई प्रणालियाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा बन रही हैं, नए प्रश्न उभर रहे हैं। इनमें स्वचालित सामग्री संयमन की जिम्मेदारी किसकी होगी, दायित्व का निर्धारण कैसे किया जाएगा, चुनावों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और उपयोगकर्ताओं की रक्षा कैसे की जाएगी, जैसे प्रश्न शामिल हैं।

ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल की पॉलिसी और एडवोकेसी प्रमुख मारिया पाज़ ने कहा, “नियामक अब भी उन प्लेटफॉर्म के लिए पुराने मध्यस्थ दायित्व नियमों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, जो अब जेनरेटिव एआई का व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल साउथ के अनुभव दर्शाते हैं कि अस्पष्ट मॉडरेशन (संयमन) प्रणालियाँ और स्वचालित निर्णय कमजोर समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अलग-अलग और असंगठित राष्ट्रीय नीतियों के बजाय अधिकार-आधारित तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।”

राज्यसभा सांसद श्री साकेत गोखले ने एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी राय साझा की। उन्होंने मतदाता डेटा, अनुवाद प्रणालियों और चुनावी मानचित्रण में एआई उपकरणों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के बिना स्वचालित प्रणालियों का उपयोग लोकतंत्र में विश्वास को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमें एआई विनियमन को उसी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, जैसे हम जलवायु परिवर्तन को देखते हैं।” उन्होंने बड़े वैश्विक चुनावों से पूर्व लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के बी-टेक परियोजना की सलाहकार इसाबेल एबर्ट द्वारा व्यवसाय और मानवाधिकार पर एक प्रस्तुति दी गई। संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय और मानवाधिकार संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया—पहला, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है; दूसरा, मानवाधिकारों का सम्मान करना कंपनियों का दायित्व है; और तीसरा, अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना आवश्यक है।

क्षेत्रीय गोलमेज चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट शासन चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में काज़िया के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इंडोनेशिया में कुछ संगठनों को महिलाओं से संबंधित डीपफेक सामग्री के कारण अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि एआई किस प्रकार लैंगिक आधार पर होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है। यद्यपि इंडोनेशिया में ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के नियम मौजूद हैं, परंतु एआई से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए कोई विशिष्ट ढांचा नहीं है, जिससे दोषियों को दंडित करना कठिन हो जाता है।

लैटिन अमेरिका से ब्राज़ील स्थित इंटरनेटलैब में शोध प्रमुख कैमिला अकेमी ने जेनरेटिव एआई उपकरणों की तीव्र वृद्धि और चुनावी निष्पक्षता पर उनके प्रभावों पर चर्चा की। वहीं अफ्रीका से पैराडाइम इनिशिएटिव के सानी सुलेमान ने नीतिगत कमियों, सीमित आधारभूत संरचना, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी तथा सरकारों और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच शक्ति असंतुलन जैसी प्रमुख चुनौतियों को दर्शाया।

एसएफएलसी.इन ने कहा कि जैसे-जैसे जेनरेटिव एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म का अभिन्न अंग बनता जा रहा है, शासन प्रणालियों को पारंपरिक इंटरनेट कानूनों से आगे बढ़ना होगा। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को शामिल करना और तीव्र गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि समावेशी और अधिकार-आधारित एआई शासन प्रणाली के निर्माण हेतु विभिन्न देशों के बीच निरंतर सहयोग और सशक्त वैश्विक साझेदारी की सख्त आवश्यकता है।

एसएफएलसी.इन ने डिजिटल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्लोबल साउथ के सुझावों को प्रमुखता देने और यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि एआई तथा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी विनियमन मानवता और जवाबदेही पर आधारित रहें।

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