राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस की फूट उजागर; तीन राज्यों में विधायकों ने पार्टी के आदेश की अवहेलना की

Rajya Sabha polls expose Congress cracks as MLAs defy party in three states
(File Photo: Congress Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए गंभीर असहज स्थिति पैदा कर दी है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा में पार्टी के कई विधायकों द्वारा या तो मतदान से दूरी बनाने या विरोधी उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने की घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार में समन्वय की कमी

बिहार में कांग्रेस को चुनाव प्रबंधन और समन्वय की कमी के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य प्रभारी कृष्ण अल्लावरु मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए पटना नहीं पहुंचे। इस चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पांच विधायकों ने महागठबंधन उम्मीदवार ए.डी. सिंह का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस के छह में से तीन विधायक वोटिंग से अनुपस्थित रहे। इसका सीधा फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिला, जिसने बिहार से पांचवीं राज्यसभा सीट जीत ली।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक नेता ने इसे कांग्रेस विधायकों की “विश्वासघात” की कार्रवाई बताया, जिससे विपक्षी गठबंधन में तनाव बढ़ गया है।

ओडिशा में संगठनात्मक संकट

ओडिशा में यह मामला और भी गहरा दिखा। बीजू जनता दल (BJD) द्वारा होटा को संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ।

कांग्रेस की कटक से विधायक सोफिया फिरदौस ने पहले ही उम्मीदवार को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व असंतोष को नियंत्रित नहीं कर सका।

मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की, जिससे उसकी जीत सुनिश्चित हो गई। बाद में पार्टी ने इन तीनों विधायकों को निलंबित कर दिया।

हरियाणा में भी दिखी अंदरूनी दरार

हरियाणा में कांग्रेस को आंशिक राहत जरूर मिली, लेकिन वहां भी पार्टी अनुशासन पर सवाल उठे। कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौध को जीत के लिए 31 वोटों की जरूरत थी, जबकि पार्टी के पास 37 विधायक थे।

इसके बावजूद बौध को केवल 28 वोट ही मिले और वे मात्र एक वोट से जीत पाए। सूत्रों के मुताबिक, पांच वोट अमान्य घोषित हुए और चार विधायकों ने कथित तौर पर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।

नेतृत्व पर उठे सवाल

तीनों राज्यों की घटनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व की राज्य इकाइयों पर पकड़ को लेकर बहस तेज कर दी है, खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी सत्ता में नहीं है।

पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि यह स्थिति कमजोर संगठनात्मक ढांचे का परिणाम है। वहीं, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों का उदाहरण दिया जा रहा है, जहां सत्ता में होने के कारण कांग्रेस ने पहले सफलतापूर्वक क्रॉस-वोटिंग को नियंत्रित किया था।

फिलहाल, राज्यसभा चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस की आंतरिक अनुशासन और समन्वय क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो आगामी चुनावों से पहले पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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