असम चुनाव: UCC को पहचान और विकास से जोड़कर पीएम मोदी का बड़ा संदेश

Assam Elections: PM Modi Delivers a Major Message by Linking UCC to Identity and Developmentचिरौरी न्यूज

गोगामुख/डिब्रूगढ़ (असम): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को भारतीय जनता पार्टी के अभियान के केंद्र में रखते हुए इसे राज्य की पहचान और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा से जोड़ा। गोगामुख में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असम में UCC लागू करना, साथ ही छठी अनुसूची के तहत आने वाले आदिवासी क्षेत्रों की परंपराओं और संस्कृति की रक्षा करना, राज्य की अस्मिता को सुरक्षित रखने जैसा है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पार्टी UCC को ‘एक जैसा कानून’ थोपने के रूप में नहीं, बल्कि एक संतुलित ढांचे के रूप में देखती है, जो कानूनी एकरूपता के साथ-साथ असम की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है। यह रणनीति विशेष रूप से उन क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जहां आदिवासी समुदायों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।

चुनावी संभावनाओं को लेकर भरोसा जताते हुए मोदी ने कहा कि जनता के समर्थन से केंद्र में सरकार ने ‘हैट्रिक’ पूरी की है और अब असम में भी NDA सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगी। उन्होंने चुनाव को “विकसित भारत” के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और दावा किया कि भाजपा राज्य में फिर से सरकार बनाएगी।

अपने संबोधन में उन्होंने पिछले दस वर्षों में NDA सरकार द्वारा किए गए कार्यों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान असम में 22 लाख से अधिक गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं, जो सरकार की ‘सेवा’ और ‘सुशासन’ की नीति का प्रमाण है। उन्होंने इस अवधि को राज्य के लिए “नई सुबह” बताते हुए बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों में आए बदलावों का उल्लेख किया।

रैली से पहले प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान का दौरा किया, जहां उन्होंने श्रमिकों, खासकर महिला कामगारों से बातचीत की और चाय की पत्तियाँ तोड़ने के कार्य में भी हिस्सा लिया। उन्होंने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि असम की चाय केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा है, जिसने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने चाय बागान श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कड़ी मेहनत ने असम को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया है। इस दौरान उन्होंने श्रमिकों के साथ उनकी संस्कृति पर चर्चा की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल चाय बागान श्रमिकों जैसे महत्वपूर्ण मतदाता समूहों से जुड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो असम की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले राज्य में चुनाव प्रचार तेज हो गया है और सभी दल मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हैं।

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