“रात 2 बजे तक निगरानी कर रहा था”: बंधक घटना को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बंगाल को फटकारा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे “सुनियोजित और प्रेरित” बताते हुए कहा कि यह न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने की कोशिश है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को भी चुनौती देता है।
यह घटना उस समय हुई जब मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से नाराज़ लोगों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों को घेर लिया। करीब नौ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में तीन महिला अधिकारियों सहित सात लोगों को बंधक बनाए रखा गया। देर रात लगभग 1 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मदद से उन्हें सुरक्षित निकाला गया।
बचाव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के वाहनों पर पथराव किया और हमला करने की कोशिश की।
चीफ़ जस्टिस ने कहा कि अधिकारियों को दोपहर 3.30 बजे घेर लिया गया था और उन्हें आधी रात के बाद ही बचाया जा सका। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सभी राजनीतिक नेताओं को कल की घटना की एक सुर में निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम यहाँ विशेष अधिकारियों की सुरक्षा के लिए हैं। उनके आदेशों को हमारी अदालत के आदेश माना जाएगा।” इसके बाद जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग को “कहीं से भी फ़ोर्स बुलानी चाहिए और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”
भारत के चीफ़ जस्टिस ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को DGP और गृह सचिव को फ़ोन करना पड़ा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अधिकारियों तक मदद पहुँचे। उन्होंने कहा, “जब उन्हें आधी रात के बाद रिहा किया गया और वे अपनी जगहों पर जा रहे थे, तो उनके वाहनों पर पत्थरबाज़ी हुई और लाठियों वगैरह से हमले किए गए।”
उन्होंने कहा, “यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक बेशर्मी भरी कोशिश है, बल्कि यह इस अदालत के अधिकार को भी चुनौती देती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और बचे हुए मामलों में आपत्तियों पर फ़ैसला सुनाने की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए एक सोची-समझी, साज़िश भरी चाल लगती है।”
“हम किसी को भी दखल देने और क़ानून को अपने हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों के मन पर मनोवैज्ञानिक हमला करने की इजाज़त नहीं देंगे। यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अपने कर्तव्य से मुँह मोड़ना भी है, और अधिकारियों को यह बताना होगा कि जानकारी दिए जाने के बाद भी उन्होंने अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित क्यों नहीं की।”
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए। अदालत ने कहा कि वह इस जांच की निगरानी भी करेगी।
कोर्ट ने राज्य के डीजीपी, गृह सचिव और अन्य अधिकारियों को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सुनवाई के दौरान सीमित संख्या में लोगों को ही उपस्थित रहने की अनुमति देने को कहा गया है।
ममता बनर्जी का बयान
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के कारण राज्य सरकार के पास कानून-व्यवस्था का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रशासन और सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है।
मुख्य न्यायाधीश ने पश्चिम बंगाल को “सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत राज्य” बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हैं और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी।
