भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को मिली नई ऊंचाई, 2030 तक रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप तैयार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच 16 मई 2026 को हेग में हुई अहम बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाने का ऐतिहासिक फैसला किया। दोनों देशों ने 2026 से 2030 तक के लिए “भारत-नीदरलैंड्स रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा” को अपनाते हुए राजनीति, व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुद्री सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और नीदरलैंड्स समान विचारधारा वाले साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इस नई रूपरेखा का उद्देश्य केंद्रित और समयबद्ध कार्य योजनाओं के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को अधिक मजबूत, व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख बनाना है।
व्यापार और निवेश पर विशेष फोकस
दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, दूरसंचार, समुद्री क्षेत्र, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, मेडटेक और हाई-टेक उद्योगों में निवेश और व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया। आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त उद्यमों, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, एसएमई और स्टार्टअप्स को भी सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। भारत और नीदरलैंड्स ने तकनीकी नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में साझा अनुसंधान को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।
जल प्रबंधन और कृषि में बढ़ेगा सहयोग
नीदरलैंड्स की जल प्रबंधन विशेषज्ञता का लाभ भारत को मिलेगा। दोनों देशों ने “जल रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने और गंगा बेसिन, शहरी जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और नदी प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। “जल उत्कृष्टता केंद्र” के माध्यम से क्षमता निर्माण और स्टार्टअप सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में जलवायु-रोधी खेती, एग्री-टेक, जैव-प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा पर संयुक्त कार्य समूह सक्रिय रहेगा। दोनों देशों ने आधुनिक कृषि तकनीकों के सह-विकास और कौशल विकास पर भी जोर दिया।
स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र में नई पहल
भारत और नीदरलैंड्स ने वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया। संक्रामक रोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), डिजिटल हेल्थ और “वन हेल्थ” जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
शिक्षा, विज्ञान और सेमीकंडक्टर मिशन
दोनों देशों ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान सहयोग को विस्तार देने पर जोर दिया। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारतीय और डच संस्थानों के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण माना गया। आइंडहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे और भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें NXP, ASML, TATA और CG Semi जैसी कंपनियां सहयोग करेंगी।
भारत और नीदरलैंड्स ने ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, सर्कुलर इकोनॉमी और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के बीच “ग्रीन एंड डिजिटल सी कॉरिडोर” विकसित करने की दिशा में भी काम होगा, जिससे समुद्री व्यापार और हरित ऊर्जा निर्यात को गति मिलेगी।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत
दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देने का फैसला किया। नौसैनिक अभ्यासों, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी विकसित करने पर भी सहमति बनी।
भारत और नीदरलैंड्स ने छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के आवागमन को आसान बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने निष्पक्ष प्रवासन व्यवस्था और अनियमित प्रवासन पर रोक के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने की बात कही।
सांस्कृतिक संबंधों को भी मिलेगी मजबूती
दोनों देशों ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, संग्रहालय सहयोग, कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। साथ ही, नीदरलैंड्स में भारतीय समुदाय और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों की भी सराहना की गई।
यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत और नीदरलैंड्स के संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की साझा भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगी।
