ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद गहराया: संसदीय समिति ने CBSE प्रमुख और शिक्षा सचिव को तलब किया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की क्लास 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रहा विवाद अब संसद की कड़ी जांच के दायरे में आने वाला है। शिक्षा पर बनी स्थायी समिति ने छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है।
यह कदम कथित तकनीकी गड़बड़ियों, मूल्यांकन में विसंगतियों और नतीजों के बाद होने वाली जांच प्रक्रिया के दौरान छात्रों को पेश आ रही चुनौतियों को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच उठाया गया है। इन शिकायतों ने सांसदों को शिक्षा विभाग के प्रमुख अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए प्रेरित किया है।
शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार और CBSE के अध्यक्ष राहुल सिंह को समिति के सामने पेश होने के लिए बुलाया है। उन्हें OSM सिस्टम के लागू होने और छात्रों द्वारा बताई गई समस्याओं के बारे में सदस्यों को जानकारी देनी होगी।
एक अहम घटनाक्रम में, CBSE के छात्रों के प्रतिनिधियों के भी इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। वे समिति को मूल्यांकन और नतीजों से जुड़ी प्रक्रियाओं के दौरान उन्हें पेश आई मुश्किलों के बारे में सीधे तौर पर जानकारी देंगे। उनकी भागीदारी से उन चिंताओं के बारे में अहम जानकारी मिलने की संभावना है, जिन्होंने हाल के हफ्तों में सोशल मीडिया और छात्रों के मंचों पर काफी जोर पकड़ा है।
समिति ने इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) के महानिदेशक को भी बुलाया है। इससे संकेत मिलता है कि सदस्य इस विवाद के तकनीकी और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी गहराई से जांच कर सकते हैं। CERT-In को शामिल करना इसलिए भी अहम है, क्योंकि सार्वजनिक मंचों पर सिस्टम में गड़बड़ियों, डेटा की सुरक्षा और डिजिटल मूल्यांकन के बुनियादी ढांचे की मजबूती को लेकर कई आरोप और चिंताएं उठाई गई हैं।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली यह स्थायी समिति क्लास 9 और 10 के लिए ‘त्रि-भाषा फॉर्मूले’ (तीन भाषाओं की नीति) को लागू करने पर भी चर्चा करेगी। यह एक और ऐसा मुद्दा है, जिसने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और राज्य सरकारों के बीच बहस छेड़ दी है।
इस बैठक में इस बात का आकलन किए जाने की उम्मीद है कि क्या तकनीक पर आधारित मूल्यांकन प्रणालियों की ओर बदलाव को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, और क्या छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।
समिति की चर्चाओं से ऐसी सिफारिशों का रास्ता खुल सकता है, जिनका मकसद परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को बढ़ाना होगा। साथ ही, इन चर्चाओं के ज़रिए स्कूली शिक्षा में सुधार से जुड़ी व्यापक चिंताओं को भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
