उज्जैन जमीन सौदे को लेकर घिरे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा

Chief Minister Mohan Yadav under fire over Ujjain land deal; Congress demands resignation.
(Screenshot/Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उज्जैन में जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर लगे आरोपों के बाद सियासत गरमा गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और सरकार को “लूट का इंजन” करार दिया।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद मोहन यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और उसके आसपास कम से कम 137 जमीनों के टुकड़े खरीदे हैं। इन जमीनों का कुल रकबा लगभग 168 एकड़ बताया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कई जमीनें उन इलाकों में खरीदी गईं, जहां आने वाले वर्षों में सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के चलते जमीनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की संभावना है। इनमें नए सड़क नेटवर्क, राजमार्ग विस्तार, भूमि उपयोग में बदलाव और वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले से जुड़ी विकास परियोजनाएं शामिल हैं।

कांग्रेस का हमला, बोली- ‘डबल इंजन नहीं, लूट का इंजन’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में “डबल इंजन सरकार” नहीं, बल्कि “लूट का इंजन” पूरी रफ्तार से चल रहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इस कथित लूट के सूत्रधार बन गए हैं। जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ सामने आई खबरें भाजपा के भीतर की गुटबाजी का नतीजा हो सकती हैं और सत्ता की कुर्सी को लेकर अंदरूनी संघर्ष चल रहा है। nमध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस पूरे मामले को “महाकाल की जमीन की लूट” बताते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार की जमीनों में कथित तौर पर भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।

परिवार और कंपनियों पर जमीन खरीदने के आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के परिवार के कई सदस्यों, जिनमें उनकी पत्नी, बहू, भाई, चचेरे भाई और परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं, ने बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है।

आरोप है कि खरीदी गई करीब 111 एकड़ जमीन उन क्षेत्रों में स्थित है, जहां सरकार की प्रमुख परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, सड़क चौड़ीकरण, नई सड़कें, शहरी विकास योजनाएं और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ जमीनों का व्यावसायिक लाभ उठाने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई। मुख्यमंत्री के चचेरे भाइयों गोविंद यादव और निलेश यादव पर आरोप है कि उन्होंने जमीन खरीदने के बाद निजी बिल्डरों के साथ विकास समझौते किए। दावा किया गया है कि खरीदी गई जमीनों पर आवासीय परियोजनाएं भी शुरू की गईं और उन्हें राज्य की रियल एस्टेट नियामक संस्था में पंजीकृत कराया गया।

हालांकि, इन आरोपों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *