NEET विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान बोले, ‘कुछ लोगों ने ‘जेन-Z’ को गुमराह करने की कोशिश की’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद को लेकर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने ‘जेन Z’ यानी युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की, जिसके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। प्रधान ने कहा कि मंत्री का पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा और उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
भुवनेश्वर स्थित GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी आकांक्षाओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा, “जेन Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। मुझे इससे कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं थी। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं और वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे।”
प्रधान ने दोहराया कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
नवीन पटनायक पर साधा निशाना
रायराखोल में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजद कार्यकर्ताओं के विरोध और ‘वापस जाओ’ के नारों से उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
एयरपोर्ट के पास बीजद की युवा और छात्र इकाई के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूं। अगर आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे भी, तो मैं वापस आऊंगा।”
उन्होंने नवीन पटनायक पर युवाओं को अपने खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाने का आरोप लगाया। प्रधान ने कहा, “नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और एक बुरा इंसान कहते हैं। क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े?”
प्रधान ने कहा कि हो सकता है कि उन्होंने राज्य के लिए बहुत सम्मान हासिल न किया हो, लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।
‘प्रसन्ना आचार्य की इजाजत के बाद आया’
प्रधान ने कहा कि बीजद के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए उन्होंने ओडिशा विधानसभा में उपनेता और बीजद विधायक प्रसन्ना आचार्य से सलाह ली थी कि उन्हें कार्यक्रम में जाना चाहिए या नहीं।
उन्होंने कहा, “प्रसन्ना भाई ने मुझे आने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि मेरा स्वागत किया जाएगा। मैं उनकी इजाजत के बाद ही यहां आया हूं।”
प्रधान ने कहा कि भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से वह 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे।
बीजद का पलटवार
धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर बीजद के संबलपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को संभालने के तरीके को लेकर ही प्रधान की आलोचना हुई थी।
पुजारी ने कहा, “किसी ने प्रधान को बदनाम नहीं किया। जंतर-मंतर पर छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित ज्यादती के कारण उनकी पार्टी और सरकार की आलोचना हुई। ऐसी घटनाओं की वजह से प्रधान पर सवाल उठे थे। आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के लिए वे नवीन पटनायक को क्यों जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, यह समझ से परे है।”
पुजारी ने दावा किया कि NEET विवाद को लेकर छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश था। उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि प्रधान की आलोचना किसी राजनीतिक साजिश के कारण नहीं, बल्कि सरकार के फैसलों और विवाद को संभालने के तरीके के कारण हुई।
संबलपुर में कई कार्यकर्ता हिरासत में
इस बीच, सूत्रों के मुताबिक संबलपुर पुलिस ने एहतियात के तौर पर बीजद के करीब 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। पुलिस को पार्टी की युवा और छात्र इकाई द्वारा विरोध-प्रदर्शन किए जाने की आशंका थी।
NEET विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ प्रधान अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए पद की अहमियत को कमतर बता रहे हैं, वहीं बीजद इसे केंद्र सरकार की कथित विफलता और छात्रों के प्रति संवेदनहीन रवैये से जोड़कर देख रहा है।
