राहुल गांधी ने एमपी हाई कोर्ट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे से जुड़े मानहानि मामले में राहत मांगी

Rahul Gandhi sought relief from the MP High Court in the defamation case involving Shivraj Singh Chouhan's son.
(Screenshot/Twitter/Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक अर्ज़ी दायर की है। इसमें उन्होंने उस बयान के लिए खेद जताया है, जिस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह ने मानहानि का केस किया है।

यह मामला 2018 में झाबुआ में हुई एक चुनावी रैली के दौरान गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कार्तिकेय सिंह का नाम लेते हुए पनामा पेपर्स लीक का ज़िक्र किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस ज़िक्र से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा।

कार्तिकेय सिंह ने भोपाल की एक विशेष MP-MLA कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियाँ मानहानि करने वाली थीं। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, ट्रायल कोर्ट ने समन जारी कर गांधी को मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

समन मिलने के बाद, कांग्रेस नेता ने समन और मानहानि की कार्यवाही, दोनों को रद्द करने की मांग करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया।

बुधवार को वकील के ज़रिए दायर अपनी अर्ज़ी में गांधी ने कहा कि संबंधित टिप्पणियों का मक़सद कार्तिकेय सिंह का ज़िक्र करना नहीं था। कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, अर्ज़ी में बयान पर खेद भी जताया गया है।

मामला जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल के सामने रखा गया, जो गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करने वाले हैं। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के निर्देशानुसार निचली अदालत के रिकॉर्ड भी पेश किए। कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से वकील संकल्प कोचर पेश हुए।

इस घटनाक्रम पर BJP IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय की तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई। उन्होंने X पर राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि विवादित टिप्पणियाँ करना और बाद में उनसे पीछे हट जाना उनका एक पैटर्न बन गया है। मालवीय ने अपनी पोस्ट में कहा, “शायद राहुल गांधी को ‘सॉरी’ (माफ़ी) को अपना मिडिल नेम बना लेना चाहिए। कोई गिन भी नहीं सकता कि उन्हें कितनी बार माफ़ी मांगनी पड़ी है, अफ़सोस जताना पड़ा है या अपने मानहानि वाले और गैर-ज़िम्मेदाराना बयानों को वापस लेना पड़ा है।

ताज़ा मामला केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह द्वारा दायर मानहानि के केस से जुड़ा है। राहुल गांधी ने अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अफ़सोस जताते हुए कहा है कि जिस बयान पर विवाद है, उसका कार्तिकेय सिंह से कोई लेना-देना ही नहीं था।

इससे एक सीधा सवाल उठता है: अगर बयान उनके बारे में नहीं था, तो उसे दिया ही क्यों गया? और अगर बिना तथ्यों के ऐसा कहा गया, तो इससे राहुल गांधी की विश्वसनीयता के बारे में क्या पता चलता है?

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