फीफ़ा वर्ल्ड कप: चोट के कारण बाहर रहने के बाद ब्राज़ील की टीम में वापसी पर नेमार हुए भावुक

FIFA World Cup: Neymar emotional upon returning to the Brazil squad after being sidelined by injury.
(File Photo/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: 76वें मिनट में जब नेमार जूनियर को सब्स्टिट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरने का संकेत मिला, तो उनकी आँखें भर आईं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का मैदान पर लौटना नहीं था, बल्कि संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की एक लंबी यात्रा का भावनात्मक पड़ाव था। जिस फुटबॉलर को कभी लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद दुनिया का अगला सबसे बड़ा सितारा माना जाता था, उसके लिए विश्व कप के मंच पर वापसी किसी ट्रॉफी जीतने से कम नहीं थी।

एक दशक पहले तक नेमार को फुटबॉल के स्वर्णिम भविष्य का चेहरा माना जाता था। उनकी प्रतिभा, रफ्तार और कौशल ने उन्हें दुनिया के सबसे चमकदार खिलाड़ियों की कतार में खड़ा कर दिया था। लेकिन उनके करियर की कहानी उतनी ही चोटों और अधूरे सपनों की भी रही। बार-बार लगी गंभीर चोटों ने ऐसे मौकों पर उन्हें मैदान से दूर किया, जब वे अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे थे। इन रुकावटों ने न केवल उनकी लय और गति को प्रभावित किया, बल्कि धीरे-धीरे उन्हें विश्व फुटबॉल के केंद्र से भी दूर कर दिया।

इसके बावजूद, ब्राज़ील में नेमार का कद आज भी वैसा ही है जैसा एक राष्ट्रीय नायक का होता है। मियामी में जब वे बेंच से उठे और मैदान पर उतरने की तैयारी करने लगे, तो पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया। दर्शकों की तालियों और जयकारों ने उस खिलाड़ी का स्वागत किया, जिसने वर्षों तक अपने देश की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाया है। इस प्यार और सम्मान ने नेमार को भावुक कर दिया। अपने चौथे फीफा विश्व कप अभियान में कदम रखने से पहले ही उनके चेहरे पर भावनाओं का सैलाब साफ दिखाई दे रहा था।

यह क्षण इसलिए भी खास था क्योंकि कुछ समय पहले तक उनकी वापसी की उम्मीदें धुंधली नजर आ रही थीं। लगातार चोटों ने उनके करियर को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। यूरोपीय फुटबॉल छोड़कर सऊदी अरब जाना और फिर ब्राज़ील लौट आना, उनके सफर के ऐसे अध्याय रहे जिन्हें कभी उनकी कहानी का हिस्सा नहीं माना जाता था। पिछले तीन वर्षों में क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में लंबी अनुपस्थिति के कारण वे 100 से अधिक मैचों से दूर रहे और कई यादगार मौके उनकी आँखों के सामने से गुजर गए।

लेकिन 981 दिनों तक ब्राज़ील की राष्ट्रीय टीम से दूर रहने के बाद आखिरकार वह इंतजार खत्म हुआ। नेमार ने पीली-हरी जर्सी दोबारा पहनी और मैदान पर कदम रखा, जबकि ब्राज़ील ने स्कॉटलैंड को 3-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की।

उनकी यह वापसी ऐसे समय में हुई जब कुछ ही दिन पहले ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने उनकी लंबी चोटिल अवधि का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें “वर्क-फ्रॉम-होम फुटबॉलर” तक कह दिया था। मगर नेमार ने शब्दों से नहीं, अपने खेल से जवाब दिया। उन्होंने एक बार फिर अपने बूट्स पहने, ब्राज़ील की जर्सी ओढ़ी और दुनिया को याद दिलाया कि संघर्ष चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, वापसी हमेशा संभव होती है।

यह सिर्फ नेमार की वापसी नहीं थी, बल्कि उस सपने की वापसी थी जिसे लाखों ब्राज़ीली प्रशंसक अब भी अपनी आँखों में संजोए हुए हैं।

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