तमिलनाडु सरकार को गो-हत्या पर मद्रास हाई कोर्ट के रोक के आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि बकरीद या किसी अन्य दिन राज्य में किसी भी गाय या बछड़े की हत्या न हो। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश में “सुधार” की ज़रूरत है।
विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के 27 मई के उस निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी, जिसमें अगस्त 1976 के सरकारी आदेश को लागू करके पूरे राज्य में गायों की हत्या पर रोक लगाने को कहा गया था।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जब कानून कुछ खास तरह की गायों को तय जगहों पर मारने की इजाज़त देता है, तो कानूनी प्रावधान के उलट कोई न्यायिक निर्देश मान्य नहीं हो सकता।
मद्रास हाई कोर्ट का आदेश जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने दिया था। यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था जिसमें दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए गायों की हत्या पर रोक लगाई गई थी।
फैसला लिखने वाले जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य से गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू व बोझा ढोने वाले मवेशियों की हत्या पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने की अपेक्षा करता है। जज ने कहा कि संविधान सभा में भी इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि गाय एक पूजनीय जानवर है और भगवान कृष्ण के समय से ही हमारी सभ्यता से जुड़ी रही है।
परंपरागत रूप से, मुसलमान बकरीद के दौरान स्थानीय नियमों के अनुसार निजी जगहों और धार्मिक सभाओं में जानवरों की कुर्बानी देते हैं, जबकि तमिलनाडु के कई हिंदू मंदिरों में भी सालाना त्योहारों के दौरान रस्मी तौर पर जानवरों की बलि दी जाती है। समुदाय के नेताओं का तर्क है कि ऐसी कुर्बानी को केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों तक सीमित रखना अव्यावहारिक है, क्योंकि कई जगहों पर त्योहार के समय की मांग को संभालने की क्षमता नहीं होती है।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून, जिनमें ‘तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम’ और बूचड़खानों को नियंत्रित करने वाले अन्य नियम शामिल हैं, पहले से ही यह तय करते हैं कि जानवरों को कहाँ और किन शर्तों के तहत मारा जा सकता है, लेकिन वे पूरी तरह से रोक नहीं लगाते हैं।
