ईरान का दावा: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य विमानों पर मिसाइल-ड्रोन हमला, कई फाइटर जेट तबाह

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: शुक्रवार को ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों और विमानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। तेहरान के अनुसार, इस कार्रवाई में कई अमेरिकी फाइटर जेट और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर विमान नष्ट हो गए, जबकि कई अन्य को गंभीर क्षति पहुंची। हालांकि, इन दावों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही अमेरिका या जॉर्डन ने किसी विमान के नुकसान की पुष्टि की है।
ईरान का यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका लगातार छठी रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। अमेरिकी हमलों में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित सैन्य बुनियादी ढांचे और तेहरान के अभियानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
‘ऑपरेशन नस्र-2’ के तहत हमला
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने एक बयान जारी कर कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी संपत्तियों पर हमला “ऑपरेशन नस्र-2” के 14वें चरण के तहत दो चरणों में किया गया।
IRGC के अनुसार, “इस अभियान में कई बैलिस्टिक मिसाइलों और बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई अमेरिकी टैंकर विमान और फाइटर जेट नष्ट हो गए, जबकि कई अन्य को गंभीर नुकसान पहुंचा।”
हालांकि, इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है।
जॉर्डन ने तीन मिसाइलें मार गिराने का किया दावा
ईरानी दावों से कुछ घंटे पहले जॉर्डन की सेना ने कहा था कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली तीन मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया। अम्मान के अनुसार, इन मिसाइलों से किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।
इस बीच, IRGC ने जॉर्डन के नागरिकों से देश में मौजूद अमेरिकी हितों को निशाना बनाने का आह्वान भी किया और वाशिंगटन पर ईरान के खिलाफ “आक्रामक कार्रवाई” करने का आरोप लगाया।
अमेरिका ने ईरान पर तेज किए हमले
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने रातभर ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान चलाए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य “ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना” था। CENTCOM ने कहा कि हमलों में दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें तटीय निगरानी प्रणाली, वायु रक्षा ठिकाने, सैन्य लॉजिस्टिक्स केंद्र और समुद्री सैन्य संपत्तियां शामिल थीं।
ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में केवल सैन्य प्रतिष्ठान ही नहीं, बल्कि नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया। सरकारी मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बंदर अब्बास, बुशहर और केशम द्वीप के आसपास विस्फोटों की सूचना मिली। इसके अलावा, होर्मोज़गन प्रांत में ईरानशहर हवाई अड्डे, एक रेलवे स्टेशन और कई पुलों पर भी हमले किए जाने का आरोप लगाया गया।
ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद हुए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि तेहरान वार्ता की मेज पर वापस नहीं लौटता, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है।
होर्मोज़गन प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष दोबारा शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 38 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इससे पहले जारी आधिकारिक आंकड़ों में 35 से अधिक मृतकों और 300 से अधिक घायलों की जानकारी दी गई थी।
मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते इस सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सीधी सैन्य कार्रवाई के चलते क्षेत्रीय सहयोगी देशों के भी संघर्ष की चपेट में आने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
