सर गारफील्ड सोबर्स के निधन पर सुनील गावस्कर भावुक, ‘आप जैसा दूसरा कभी नहीं होगा’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: वेस्टइंडीज़ के महान क्रिकेटर और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में शुमार सर गारफील्ड सोबर्स के निधन पर भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए सोबर्स को क्रिकेट इतिहास का सबसे महान ऑलराउंडर और “एक आदर्श क्रिकेटर की परिभाषा” बताया।
अपने संदेश में गावस्कर ने लिखा, “शांति से विश्राम कीजिए, सर गैरी। आपके जैसा दूसरा कभी नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि क्रिकेट प्रेमियों के लिए सोबर्स केवल एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि यह मानक थे कि एक संपूर्ण क्रिकेटर कैसा होना चाहिए।
गावस्कर ने लिखा, “आज जब हम ऑलराउंडरों की बात करते हैं तो ऐसे खिलाड़ियों का जिक्र करते हैं जो दो विभागों में योगदान देते हैं। लेकिन सर गैरी पांच अलग-अलग भूमिकाओं में माहिर थे। वह शानदार बल्लेबाज थे, नई गेंद से तेज़-मध्यम गेंदबाजी कर सकते थे, बाएं हाथ की पारंपरिक स्पिन और रिस्ट स्पिन दोनों डालते थे, साथ ही शॉर्ट लेग और स्लिप में बेहतरीन फील्डर भी थे।”
उन्होंने कहा कि मैदान पर सोबर्स की मौजूदगी अपने आप में एक अलग अनुभव होती थी। “उनकी कैरेबियाई अंदाज में मैदान पर एंट्री, कॉलर उठाकर चलना और पूरे आत्मविश्वास के साथ खेलना किसी शाही व्यक्तित्व से कम नहीं लगता था। वह खेल को आनंद और गरिमा के साथ खेलते थे।”
भारत के खिलाफ भी छोड़ते थे गहरी छाप
गावस्कर ने उन दिनों को भी याद किया जब भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच मुकाबले होते थे। उन्होंने लिखा, “जब भी भारत वेस्टइंडीज़ के खिलाफ खेलता था, सर गैरी सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे। भले ही वह मैच भारत से दूर ले जा रहे हों, लेकिन उनकी प्रतिभा की तारीफ किए बिना कोई नहीं रह सकता था।”
उन्होंने सोबर्स की 365 रन की ऐतिहासिक नाबाद पारी और एक ओवर में छह छक्के लगाने की उपलब्धि को क्रिकेट इतिहास की अमर यादें बताया। साथ ही कहा कि मैदान के बाहर भी वह बेहद विनम्र, ज्ञान साझा करने वाले और क्रिकेट की परंपराओं का सम्मान करने वाले इंसान थे।
गावस्कर ने अपने संदेश के अंत में लिखा, “आज क्रिकेट ने अपना सबसे चमकदार सितारा खो दिया है। स्टेडियम पहले से अधिक शांत लगेंगे और यह खेल उनके बिना पहले जैसा नहीं रहेगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और दुनिया भर के उन सभी क्रिकेट प्रेमियों के साथ हैं, जो इस अपूरणीय क्षति का शोक मना रहे हैं।”
सर गारफील्ड सोबर्स का शानदार करियर
बारबाडोस में जन्मे सर गारफील्ड सोबर्स ने महज़ 16 वर्ष की उम्र में 1953 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और अगले ही वर्ष वेस्टइंडीज़ के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने लगे। 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने नाबाद 365 रन बनाकर उस समय टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाया। यह रिकॉर्ड 36 वर्षों तक कायम रहा, जिसे 1994 में उनके ही देश के ब्रायन लारा ने तोड़ा।
सोबर्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 93 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 8,032 रन 57.78 की शानदार औसत से बनाए और 235 विकेट भी हासिल किए। वह आज भी टेस्ट क्रिकेट में 5,000 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में चौथे सबसे बेहतर बल्लेबाजी औसत वाले खिलाड़ी हैं।
इसके अलावा, 1968 में इंग्लैंड के स्वानसी स्थित सेंट हेलेन्स ग्राउंड पर नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए ग्लैमरगन के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट के एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। यह उपलब्धि आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित उपलब्धियों में गिनी जाती है।
सर गारफील्ड सोबर्स का निधन क्रिकेट जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनके रिकॉर्ड, उनकी प्रतिभा और खेल के प्रति उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
