तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को राहत, कोलकाता हाई कोर्ट ने बुलडोज़र एक्शन पर लगाई रोक

Relief for Trinamool Congress MP Abhishek Banerjee; Calcutta High Court stays bulldozer action.
(File Photo/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली:रविवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को राहत मिली। कलकत्ता हाई कोर्ट ने दक्षिण 24 परगना के अमतला में उनके लोकसभा क्षेत्र के ऑफिस को गिराने पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया और सभी पक्षों से कहा कि वे अगले आदेश या सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखें।

यह अंतरिम आदेश तब आया जब बनर्जी की कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ ने बुलडोज़र कार्रवाई के खिलाफ़ तुरंत दखल की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। याचिकाकर्ता का दावा था कि उनके पास ज़मीन के वैध कागज़ात थे, फिर भी ऑफिस गिरा दिया गया। इसके बाद जस्टिस राजा बसु चौधरी की बेंच के सामने मामले की तत्काल सुनवाई का ज़िक्र किया गया।

इस तोड़-फोड़ की घटना से तीखा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में की गई, जबकि मामला हाई कोर्ट में लंबित था।

तोड़-फोड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर गैर-कानूनी तरीके से काम करने का आरोप लगाया और कहा कि कार्रवाई के दौरान परिसर से कीमती सामान हटा लिया गया।

बनर्जी ने X पर लिखा, “बंगाल में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बुलडोज़र से तोड़-फोड़ को असंवैधानिक बताने वाले फैसलों के बावजूद, कल अमतला में मेरे लोकसभा क्षेत्र के ऑफिस को गिरा दिया गया।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि वीडियो में पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान “बीजेपी के गुंडों” के साथ लैपटॉप, प्रिंटर, कागज़ात, फर्नीचर और ऑफिस का अन्य सामान ले जाते हुए दिखे। उन्होंने इस कार्रवाई को तोड़-फोड़ के बजाय “वर्दी में चोरी” बताया। उन्होंने पुलिस पर “कानून के शासन का पूरी तरह से अनादर” करने का भी आरोप लगाया, जबकि मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन था।

यह ताज़ा याचिका तृणमूल कांग्रेस द्वारा पहले की गई कानूनी कार्रवाई के बाद आई है, जब विधानसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद पार्टी ऑफिस पर कथित तौर पर हमला हुआ था। तब पार्टी ने हाई कोर्ट का रुख किया था और दावा किया था कि पुलिस कार्रवाई करने में नाकाम रही। वह मामला जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने लिस्ट किया गया था, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो सकी थी।

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