ईरान का दावा: अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन कब्जे में लिया, MQ-9 रीपर गिराने का भी दावा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ईरान ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास अमेरिकी सेना के एक अत्याधुनिक मानवरहित पनडुब्बी वाहन (Unmanned Underwater Vehicle) को कब्जे में ले लिया है। ईरान के इस दावे से अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के आधिकारिक समाचार आउटलेट सेपाह न्यूज़ के मुताबिक, ईरानी नौसेना ने एक जटिल खुफिया अभियान के दौरान अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को पकड़ा। ईरान ने इसकी पहचान Dive-LD के रूप में की है और इसका एक वीडियो भी जारी किया है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि यह वाहन आधुनिकतम अंडरवॉटर तकनीक से लैस है। इसके अलावा IRGC ने अलग बयान में दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर एक MQ-9 Reaper ड्रोन को भी मार गिराया है।
अमेरिका ने क्या कहा?
ईरान के दावे के बाद अमेरिकी सेना ने भी बयान जारी किया। अमेरिकी रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि क्षेत्रीय जल का सर्वेक्षण कर रहा एक अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन एक दिन पहले खराब हो गया था। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ईरान द्वारा कब्जे में लिए जाने का दावा किया गया वाहन वही ड्रोन था या नहीं।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, खराब हुआ ड्रोन एक पुराना मॉडल था और उसमें संवेदनशील डेटा, वर्गीकृत सोनार या रडार उपकरण मौजूद नहीं थे।
अमेरिका समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के जहाजों तथा पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए मानवरहित नौसैनिक प्रणालियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। इन तकनीकों का उद्देश्य बिना सैनिकों की जान जोखिम में डाले समुद्र के बड़े इलाकों की निगरानी करना भी है।
Anduril के मुताबिक, Dive-LD बिना बेस पर लौटे करीब 10 दिनों तक काम कर सकता है और लगभग 6,000 मीटर (19,700 फीट) तक की गहराई में उतरने के लिए डिजाइन किया गया है। अमेरिकी सैन्य समाचार वेबसाइट DefenseScoop की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, एक Dive-LD यूनिट की कीमत करीब 25 लाख डॉलर बताई गई थी।
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा एक अमेरिकी युद्धपोत पर हमले के बाद अमेरिकी बलों ने पांच ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया। CENTCOM के अनुसार, ये हमले उस समय किए गए जब ईरान ने लगातार दो दिनों में अमेरिकी युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की।
अमेरिका ने ईरानी एयरलाइंस पर बढ़ाया दबाव
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी Specially Designated Nationals (SDN) सूची में शामिल किया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से सरकार की गतिविधियों को समर्थन देती रही हैं।
अमेरिका के मुताबिक, IRGC निजी तौर पर संचालित दिखने वाली एयरलाइंस का इस्तेमाल हथियारों की खरीद, उनके परिवहन और सैन्य कर्मियों की आवाजाही के लिए करता है।
अमेरिका ने पहली बार Mahan Air पर अक्टूबर 2011 में प्रतिबंध लगाया था। नए प्रतिबंधों में कथित फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और ऐसे ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है, जिनका इस्तेमाल ईरान अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए करता है।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा- प्रतिरोध जारी रहेगा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि उनका देश तब तक मजबूती से प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक आक्रामक ताकतों को अपने कदम पर पूरी तरह पछतावा नहीं होता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है और पश्चिम एशिया की सुरक्षा तथा लोगों के हितों के लिए युद्ध से बचना जरूरी मानता है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह ईरान ने अब तक आक्रामकता के खिलाफ मजबूती से अपनी रक्षा की है, उसी तरह वह आगे भी अपने प्रतिरोध को जारी रखेगा और ईरानी जनता के अधिकारों की रक्षा करेगा।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान तथा ईरान के अन्य शहरों पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों एवं सैन्य संपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर दिया।
बाद में 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह अवधि 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन हालिया तनाव और सैन्य घटनाक्रम के बाद बातचीत का भविष्य अब भी स्पष्ट नहीं है।
