कावेरी विवाद पर तमिलनाडु विधानसभा में घमासान, सीएम विजय बोले, ‘राज्य के हितों के लिए अपमान भी सहने को तैयार’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक से सीधे बातचीत की अपनी पहल का बचाव किया है। शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के साथ तीखी बहस के दौरान विजय ने कहा कि अगर बातचीत के प्रयास से तमिलनाडु के हितों की रक्षा हो सकती है, तो वह इसके लिए किसी भी “अपमान” को सहने के लिए तैयार हैं।
विजय ने विधानसभा में मेकेदाटु बांध मुद्दे पर उदयनिधि स्टालिन के सर्वदलीय बैठक बुलाने के सुझाव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कावेरी जल के अधिकारों से तमिलनाडु कोई समझौता नहीं करेगा और इस अंतरराज्यीय विवाद को राजनीतिक लड़ाई में नहीं बदला जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सर्वदलीय बैठक बुलाने की जरूरत नहीं है। कृपया मेकेदाटु बांध मुद्दे पर राजनीति न करें।” उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष की चिंताओं को सुना है और कावेरी जैसे भावनात्मक मुद्दे का राजनीतिकरण करने का कोई इरादा नहीं है।
विजय ने बताया कि इससे पहले सभी दलों ने मिलकर मेकेदाटु बांध के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र से इस परियोजना को मंजूरी न देने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने अपना रुख प्रधानमंत्री को पत्र के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है। नदी जल और मेकेदाटु बांध के मामले में तमिलनाडु के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
विजय ने विधानसभा में 1969 से चले आ रहे कावेरी विवाद के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य ने समय-समय पर बातचीत और कानूनी रास्तों, दोनों का सहारा लिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह पुराने फैसलों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा, “मैं सस्ती राजनीति के लिए पुराने इतिहास को नहीं उठाना चाहता। इस मुद्दे से किसे राजनीतिक फायदा होगा या श्रेय किसे मिलेगा, इस बारे में नहीं सोचना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कावेरी विवाद पर कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और तमिलनाडु अपने अधिकारों की मजबूती से रक्षा करता रहेगा। विजय ने कहा कि कर्नाटक से सीधे बातचीत का प्रस्ताव तमिलनाडु के कानूनी रुख से अलग नहीं है। उनका उद्देश्य केवल यह देखना है कि क्या बातचीत के जरिए समाधान की कोई संभावना निकल सकती है।
उन्होंने कहा, “कुछ लोग पूछ रहे हैं कि अगर इस कोशिश से तमिलनाडु को शर्मिंदगी उठानी पड़ी तो क्या होगा। अगर ऐसा होता है तो भी मैं राज्य के लोगों के लिए वह अपमान सहने को तैयार हूं।”
उदयनिधि ने उठाए सवाल
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विजय सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब कर्नाटक सरकार ने मेकेदाटु बांध के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की है, तो तमिलनाडु सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा, “कर्नाटक मेकेदाटु बांध बनाने को लेकर लगातार कदम उठा रहा है। हमें भी यह दिखाना चाहिए कि तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं।” उदयनिधि ने मुख्यमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा कि क्या सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाएगी या नहीं। उन्होंने विजय के कर्नाटक दौरे को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार के अलग-अलग मंत्रियों के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने पूछा, “क्या मुख्यमंत्री सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे या नहीं? क्या मुख्यमंत्री कर्नाटक जाएंगे या नहीं?”
विशेष पैकेज को लेकर भी हुई बहस
विधानसभा में दोनों नेताओं के बीच सरकार द्वारा घोषित विशेष पैकेज को लेकर भी बहस हुई। मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति करने वालों को यह जानकारी होनी चाहिए कि विशेष पैकेज बांटा जा रहा है और अगर वे अखबार पढ़ते तो उन्हें इसकी जानकारी होती।
इस पर उदयनिधि ने पलटवार करते हुए 134 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज और सूखा राहत राशि का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से सहायता वितरण का पूरा ब्योरा जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा, “इसके लिए अखबार पढ़ने की जरूरत नहीं है।” उदयनिधि ने टीवीके के चुनावी वादे का भी जिक्र किया, जिसमें किसानों के कर्ज माफ करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को इस वादे को पूरा करने के लिए समय चाहिए तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि कितना समय लगेगा।
