आरजी कर मामले में पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष गिरफ्तार, जल्दबाजी में पीडिता की अंतिम संस्कार करने के आरोपों की जांच तेज

चिरौरी न्यूज
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेप-हत्या मामले में पुलिस ने गुरुवार को पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया। घोष पर 2024 में महिला ट्रेनी डॉक्टर के शव के कथित तौर पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराए जाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, पूर्व विधायक को ओडिशा के संबलपुर से हिरासत में लिया गया। उनके खिलाफ सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश रचने और किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर करने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
निर्मल घोष पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक रत्ना देबनाथ कर रही हैं। रत्ना देबनाथ पीड़ित डॉक्टर की मां हैं।
FIR के दो दिन बाद गिरफ्तारी
निर्मल घोष की गिरफ्तारी उनके खिलाफ FIR दर्ज होने के दो दिन बाद हुई है। पुलिस ने यह मामला पीड़िता के पिता की नई शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घोष उन तीन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने उनकी बेटी के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने के लिए दबाव बनाया।
इस मामले में घोष के अलावा पानीहाटी नगर पालिका के पार्षद सोमनाथ डे और पीड़ित परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया है।
पीड़िता के पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि तीनों आरोपियों की कथित देखरेख में शव का बेहद जल्द अंतिम संस्कार किया गया। उनका दावा है कि ऐसा दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना को रोकने और महत्वपूर्ण सबूतों को छिपाने के उद्देश्य से किया गया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में आरोपियों की क्या भूमिका थी।
सुवेंदु अधिकारी ने उठाए थे सवाल
इस मामले ने उस समय फिर तूल पकड़ा, जब रविवार को पानीहाटी में पीड़ित डॉक्टर के लिए आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने बैरकपुर पुलिस कमिश्नर से कथित जल्दबाजी में किए गए अंतिम संस्कार की नए सिरे से जांच कराने की मांग की थी।
अधिकारी ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे। इनमें अंतिम संस्कार की फीस कथित तौर पर माफ किए जाने और संबंधित दस्तावेजों पर पीड़िता के परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने जैसे मुद्दे शामिल थे।
CBI जांच से अलग है नया मामला
बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जल्दबाजी में अंतिम संस्कार से जुड़ा यह नया मामला आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के रेप और हत्या की जांच से अलग है। उस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है।
अब पुलिस की जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि पीड़िता के अंतिम संस्कार में कथित तौर पर जल्दबाजी क्यों की गई और इस पूरी प्रक्रिया में पूर्व विधायक निर्मल घोष समेत अन्य आरोपियों की क्या भूमिका थी।
