जयशंकर ने कहा, सहयोगी अगर भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं को नहीं समझता, तो रिश्तों पर असर
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में आतंकवाद को एक अहम मुद्दा बताते हुए कहा है कि भारत के लिए यह समझना जरूरी है कि उसका सहयोगी किन देशों के साथ क्या कर रहा है और किन मुद्दों पर किस तरह की नीति अपना रहा है।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों तक पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवाद का सामना किया है। उनके मुताबिक, ऐसे में यदि कोई करीबी साझेदार भारत की इस मुख्य चिंता को पर्याप्त रूप से नहीं समझता या उस पर संवेदनशीलता नहीं दिखाता, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है।
भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद जयशंकर ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है,जिन्होंने लंबे समय तक पड़ोसी देश की कथित नीति के तहत आतंकवाद का सामना किया है।
जयशंकर ने कहा, “अगर मेरा सहयोगी मेरी मुख्य चिंताओं में से किसी एक को पूरी तरह नहीं समझता, तो जाहिर है कि इसका रिश्तों पर कुछ हद तक असर पड़ता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत निश्चित रूप से अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बेहतर होते देखना चाहता है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों को ध्यान में रखना होगा।
अमेरिका की पाकिस्तान नीति का भी जिक्र
विदेश मंत्री ने अमेरिका की घरेलू राजनीति और वहां होने वाले घटनाक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के अंदर की परिस्थितियां भी इस बात को प्रभावित करती हैं कि वहां की सरकार भारत समेत दूसरे देशों के साथ किस तरह व्यवहार करती है।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई की थी। भारत ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति का हिस्सा बताया था। पाकिस्तान ने भारत के आरोपों और कार्रवाई पर अलग रुख अपनाया था। भारत-अमेरिका और पाकिस्तान के संदर्भ में अक्सर ओसामा बिन लादेन का मामला भी चर्चा में आता है। 11 सितंबर 2001 के अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी लादेन को 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी अभियान में मारा गया था। एबटाबाद पाकिस्तान का एक प्रमुख सैन्य केंद्र है।
जयशंकर ने अपने बयान में पाकिस्तान का सीधे नाम नहीं लिया,लेकिन उनका जोर इस बात पर था कि आतंकवाद से जुड़ी भारत की चिंताओं को उसके सहयोगी देशों द्वारा गंभीरता से समझा जाना चाहिए।
FATF और पाकिस्तान
पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, FATFकी निगरानी प्रक्रिया और आतंकवाद की फंडिंग तथा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानक पाकिस्तान के लिए अब भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी नियमों के तहत सदस्य देशों को नामित आतंकवादियों की वित्तीय संपत्तियों और आर्थिक संसाधनों को फ्रीज करने सहित कई कदम उठाने होते हैं। जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दे हैं, जिनमें व्यापार भी शामिल है। उनके मुताबिक, जिन मुद्दों पर दोनों देश आगे बढ़ने में सक्षम होंगे,उसी अनुपात में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
