परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द होने पर सियासत तेज, एमके स्टालिन ने बताया तमिलनाडु के विकास के लिए बड़ा झटका
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तमिलनाडु में प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द किए जाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सोमवार को मुख्यमंत्री विजय के फैसले की आलोचना करते हुए इसे राज्य के विकास के लिए बड़ा झटका बताया। वहीं, मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों के हितों और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
एमके स्टालिन ने अपने बयान में परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द करने के फैसले को “बड़ी निराशा” और तमिलनाडु के विकास के लिए “अपरिवर्तनीय झटका” बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों से राजनीतिक कारणों के चलते समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
स्टालिन ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने विधानसभा के नियम 110 के तहत इस फैसले की घोषणा क्यों की, क्योंकि इस नियम के तहत सदन में चर्चा की अनुमति नहीं होती।
स्टालिन के मुताबिक, तमिलनाडु की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए चेन्नई को एक विश्वस्तरीय दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के विस्तार के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण थी।
उन्होंने दावा किया कि परंदूर को वैकल्पिक स्थानों के मूल्यांकन के बाद चुना गया था और परियोजना से जुड़े कई जरूरी काम और मंजूरियां पहले ही पूरी हो चुकी थीं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी काफी आगे बढ़ चुकी थी और सरकार इस पर बड़ी रकम खर्च कर चुकी थी।
नई जगह पर प्रोजेक्ट शुरू करने में लग सकते हैं कई साल
स्टालिन ने कहा कि पिछली डीएमके सरकार ने प्रभावित जमीन मालिकों के लिए बेहतर मुआवजे और पुनर्वास उपायों की पेशकश भी की थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार नई जगह पर एयरपोर्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू करती है तो जमीन अधिग्रहण, मंजूरियों और अन्य प्रक्रियाओं में फिर से काफी समय लगेगा। इससे निर्माण में कई वर्षों की देरी हो सकती है और तमिलनाडु में निवेश की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
पूर्व मंत्री और डीएमके नेता उधयनिधि स्टालिन ने भी फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि परियोजना पर पहले ही बड़ी मात्रा में सरकारी धन खर्च हो चुका है और इसे रद्द करने से राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री विजय ने फैसले का किया बचाव
मुख्यमंत्री विजय ने परंदूर एयरपोर्ट को रद्द करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकार विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन विकास की कीमत स्थानीय लोगों को चुकाने नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एयरपोर्ट साइट का करीब 55 फीसदी हिस्सा जलाशयों और वेटलैंड्स में आता है। ऐसे में इलाके में बाढ़ के खतरे के साथ-साथ रनवे और विमान संचालन की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं थीं।
विजय ने कहा कि सरकार चेन्नई के लिए दूसरा एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में है और इसके लिए नई जगह की तलाश की जाएगी। नए स्थान का चयन विस्तृत तकनीकी और व्यवहार्यता अध्ययन के बाद किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों का विरोध कम से कम हो और परियोजना सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सके।
परंदूर के ग्रामीणों ने फैसले का स्वागत किया
परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों में से एक एकनापुरम के ग्रामीणों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विजय को धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे उनकी जमीन और घरों पर मंडरा रहा विस्थापन का खतरा टल गया है।
परंदूर एयरपोर्ट को लेकर अब तमिलनाडु की राजनीति में विकास, रोजगार, निवेश और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ डीएमके इसे राज्य की आर्थिक प्रगति में बाधा बता रही है, जबकि सरकार स्थानीय समुदायों और पर्यावरण की सुरक्षा को फैसले की मुख्य वजह बता रही है।
