नेपाल में फ्लैश फ्लड से 469 लोगों की मौत, 1,468 लापता; भारत के 178 नागरिक भी शामिल

469 dead, 1,468 missing in Nepal flash floods; 178 Indian citizens among themचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: काठमांडू: नेपाल में इस सप्ताह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 469 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 1,468 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 178 भारतीय नागरिक शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान 11 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

आपदा के बाद नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में स्थिति और गंभीर होती जा रही है। चीन ने ऊपरी इलाकों में संभावित भू-वैज्ञानिक जोखिम को लेकर नया अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों को आशंका है कि भूस्खलन के कारण बनी एक बैरियर झील के टूटने से निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है।

लापता लोगों में कई विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री

लापता लोगों में कई विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इनमें नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के लिए गए लोग और तिब्बत स्थित पवित्र माउंट कैलाश की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

वैंटोर टेक्नोलॉजी की ओर से जारी नई सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत-नेपाल के रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग को पूरी तरह क्षतिग्रस्त देखा गया है। तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ग्लेशियर से आई बाढ़ ने घाटी के बड़े हिस्से को बहा दिया है।

हवाई फुटेज में सीमा क्षेत्र में एक नई झील भी दिखाई दी है, जिसका आकार लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों ने इसके संभावित रूप से टूटने को लेकर चिंता जताई है।

चीन ने जारी किया लेवल-IV अलर्ट

नेपाल में तबाही के बीच चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर लेवल-IV अलर्ट जारी किया है। चीन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बुधवार को हुए भूस्खलन के कारण दो नदियों के संगम पर बनी एक बैरियर झील के टूटने का खतरा है। अगर झील टूटी तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति घोषित की है। अधिकारियों के मुताबिक, यह बैरियर झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियां तिब्बत से निकलकर भोटे कोशी नदी प्रणाली के जरिए नेपाल में प्रवेश करती हैं।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था। लगातार बारिश जारी रहने पर पानी की मात्रा बढ़कर करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की आशंका है। ऐसे में झील के टूटने का खतरा और बढ़ सकता है।

झील के टूटने की स्थिति में बाढ़ का पानी निचले इलाकों की ओर तेजी से बढ़ सकता है। इससे चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट समेत आसपास के इलाकों में भारी नुकसान होने की आशंका है। चीन की प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली में चार स्तर हैं, जिनमें लेवल-I सबसे गंभीर और लेवल-IV सबसे निचला स्तर माना जाता है।

नेपाल में युद्धस्तर पर जारी बचाव अभियान

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में सैकड़ों लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव दल और सेना के हेलीकॉप्टर लगातार अभियान चला रहे हैं। ग्लेशियर टूटने के बाद पानी और कीचड़ का कई मंजिल ऊंचा तेज बहाव बस्तियों में घुस गया था। इस दौरान कई घर, इमारतें और पुल इसकी चपेट में आकर ढह गए।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में बाढ़ का भयावह मंजर दिखाई दे रहा है। कई जगह लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए, जबकि तेज बहाव में कई लोग और वाहन बह गए।

हिमालय का यह इलाका अपनी ऊंची पर्वत चोटियों और ग्लेशियरों के लिए जाना जाता है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी काफी अधिक रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से ऐसी घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है।

नेपाल ने विदेशी सर्च और रेस्क्यू टीमों का प्रस्ताव ठुकराया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश के लिए कई देशों की ओर से भेजी जाने वाली सर्च और रेस्क्यू टीमों के प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।

‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार का कहना है कि नेपाली सुरक्षा एजेंसियां मौजूदा सर्च और रेस्क्यू अभियान को संभालने में सक्षम हैं।

सरकार ने इसके बजाय अंतरराष्ट्रीय मदद के लिए ‘वन-डोर मैकेनिज्म’ अपनाने की बात कही है। इसके तहत नेपाल फिलहाल नकद आर्थिक सहायता चाहता है। अधिकारियों के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण के चरण में अतिरिक्त वित्तीय सहायता और अन्य जरूरी मदद की जरूरत होगी।

कई देशों ने नेपाल के लिए पहले ही आर्थिक सहायता का ऐलान कर दिया है। वहीं, अन्य देशों ने भी खोज एवं बचाव, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग की इच्छा जताई है।

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