तमिलनाडु की सियासत में ‘जॉ’ जेस्चर पर घमासान, स्टालिन ने विजय को सुनाया जेल में यातना का अनुभव
चिरौरी न्यूज
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री विजय के विधानसभा में किए गए कथित ‘जॉ’ जेस्चर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस इशारे को डीएमके नेताओं ने पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन का मजाक उड़ाने वाला बताया। हालांकि, विजय ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह अनजाने में हुआ और इसका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
विजय के स्पष्टीकरण के बावजूद अब एमके स्टालिन ने इस मुद्दे पर जोरदार पलटवार किया है। स्टालिन ने अपने जेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि इमरजेंसी के दौरान पुलिस की कथित यातना में उनकी जबड़े की हड्डियां टूट गई थीं। स्टालिन ने कहा कि उस समय वह 20 साल की उम्र में डीएमके की युवा शाखा के नेता थे। 1976 में इमरजेंसी के दौरान करुणानिधि के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
स्टालिन ने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा, “जेल में हमने कई तरह की क्रूरता झेली। हमें कुष्ठ रोगियों के साथ रखा गया। दस लोगों को एक छोटे से कमरे में बंद किया गया था। सेल में सिर्फ एक यूरिनल था। चारों तरफ बदबू रहती थी और हमें वहीं सोना पड़ता था।”
उन्होंने कथित पुलिस यातना का जिक्र करते हुए कहा कि रात में पुलिस उन्हें सोने नहीं देती थी। लाठियों और जूतों से पीटा जाता था और कैदियों से भी मारपीट कराई जाती थी। स्टालिन ने कहा कि उनके साथ मौजूद चिट्टी बाबू सांसद की जेल में मौत हो गई थी और उस हमले के दौरान उनके जबड़े की हड्डियां टूट गई थीं।
विजय पर स्टालिन का सीधा हमला
विजय के विधानसभा में किए गए इशारे को अनुचित बताते हुए स्टालिन ने कहा कि उन्होंने हाथ से अपने जबड़े की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा कि आज भी उनके शरीर पर उन चोटों के निशान मौजूद हैं। स्टालिन ने विजय से तमिलनाडु और डीएमके के इतिहास को पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि यह वही इतिहास है, जिसकी शुरुआत अन्नादुरई के दौर से होती है और जिसे विजय अपना प्रेरणास्रोत बताते हैं।
स्टालिन ने कहा, “मेरी जिंदगी और मेरे संघर्ष के बारे में पढ़िए। आपको सच्चाई नहीं पता है।”
विजय ने दी सफाई
यह विवाद 7 सितंबर को विधानसभा में विजय के भाषण के बाद शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मुख्य विपक्षी दल डीएमके पर निशाना साधा था। इसी दौरान विजय को एक हाथ से अपने जबड़े को पकड़ते हुए देखा गया। डीएमके नेताओं ने आरोप लगाया कि यह इशारा एमके स्टालिन का मजाक उड़ाने के लिए किया गया था। विवाद बढ़ने के बाद विजय ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि विधानसभा में उनका बॉडी लैंग्वेज एक आकस्मिक और अनजाना हावभाव था।
विजय ने कहा कि उनका इशारा किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं किया गया था और इसे किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस विवाद ने विजय को उनके राजनीतिक सहयोगी CPM के साथ भी असहज स्थिति में ला दिया है।
CPM के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने मुख्यमंत्री के इशारे की आलोचना करते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौरान स्टालिन को पुलिस ने बुरी तरह पीटा था और उस दौरान उनका जबड़ा टूट गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की सियासत में डीएमके और विजय के बीच जुबानी जंग और तेज होती दिखाई दे रही है।
