संयुक्त राष्ट्र ने माना, सुरक्षा परिषद सुधार में अब और देरी नहीं; पीएम मोदी के बयान का किया समर्थन
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती और संयुक्त राष्ट्र को वर्ष 2026 की दुनिया के अनुरूप खुद को ढालना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर आयोजित सत्र में कहा था कि UNSC में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक ‘पिरामिड’ से की, जहां सत्ता और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि इन फैसलों से प्रभावित देशों की भूमिका सीमित है।
‘ग्लोबल साउथ’ को निर्णय प्रक्रिया में मिले अधिक प्रतिनिधित्व
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ दुनिया के अनेक संकटों के केंद्र में है, लेकिन वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह अभी भी ‘पिछली कतार’ में है। उन्होंने मौजूदा ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ को ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ में बदलने का आह्वान किया, जिसमें प्रत्येक देश की आवाज और हिस्सेदारी हो।
उन्होंने BRICS देशों से वैश्विक शासन में सुधार के लिए सामूहिक रूप से 10 प्रस्ताव तैयार करने का आग्रह किया। इन प्रस्तावों को अगले BRICS शिखर सम्मेलन तक ‘BRICS Reform Roadmap’ का रूप देने की बात कही गई। इस रोडमैप में मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों, प्रतिनिधित्व, जवाबदेही/प्रतिक्रियाशीलता और नियम-निर्माण, पर ध्यान देने का सुझाव दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया को निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन को एक तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
BRICS घोषणा में भी UNSC सुधार पर जोर
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में भी वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
घोषणा में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक सार्थक भागीदारी की मांग की गई। विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया।
BRICS ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और दक्ष बनाना होना चाहिए। समूह ने स्पष्ट रूप से कहा कि UNSC सुधार से ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत होनी चाहिए।
BRICS घोषणा में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष पदों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता और समावेशिता की मांग की गई। इसमें कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के वरिष्ठ पदों पर किसी एक देश या देशों के समूह का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
अगले UN महासचिव के चयन को लेकर भी BRICS ने लैंगिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। घोषणा में रेखांकित किया गया कि अब तक कोई महिला संयुक्त राष्ट्र महासचिव नहीं चुनी गई है।
दुजारिक ने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात में वैश्विक संघर्षों पर चर्चा हुई। इनमें मध्य पूर्व और यूक्रेन की स्थिति प्रमुख रूप से शामिल थी। कुल मिलाकर, BRICS सम्मेलन में UNSC सुधार और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता द्वारा मौजूदा सुरक्षा परिषद संरचना को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत स्वीकार करना इस बहस को और महत्वपूर्ण बनाता है।
