ECI को लेकर विपक्ष का हमला, चुनाव आयुक्तों की असहमति के दावे पर आयोग की सफाई

Opposition attacks ECI; Commission clarifies stance on claims regarding Election Commissioners' dissent.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों पर कथित तौर पर “रिकॉर्ड पर आपत्ति” दर्ज कराई थी।

हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने इस दावे से अलग तस्वीर पेश की है। सूत्रों ने कहा कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने औपचारिक रूप से असहमति दर्ज नहीं कराई थी। उनके मुताबिक, आयुक्तों की ओर से कुछ सुझाव और टिप्पणियां जरूर दी गई थीं, जिन पर आयोग ने विचार किया।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं। आयोग के कामकाज से जुड़े नियमों के तहत तीन सदस्यीय आयोग में किसी मुद्दे पर दो आयुक्तों की सहमति होने पर बहुमत का फैसला प्रभावी होता है।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि आयोग के सभी फैसले, जिसमें मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का फैसला भी शामिल है, तीनों सदस्यों की मंजूरी से लिए गए हैं।

चुनाव आयोग की मतदाता सूची में सुधार के लिए चलाए जा रहे SIR को लेकर विपक्ष और BJP के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और इससे BJP को राजनीतिक लाभ पहुंच सकता है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया है। ताजा रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट साझा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही पर विचार करने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को किस तरह बहाल किया जा सकता है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आयोग को “कठपुतली” बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर काम करना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।

विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता की मांग की। इस पूरे विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं—एक ओर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का उल्लेख है, जबकि दूसरी ओर मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि ये औपचारिक असहमतियां नहीं, बल्कि सुझाव और टिप्पणियां थीं तथा आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

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