ज्ञानेश कुमार कठपुतली, इस्तीफा दें: मल्लिकार्जुन खड़गे की EC से 5 मांगें

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को नरेंद्र मोदी सरकार की “कठपुतली” बताया और कहा कि उन्हें “पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है”। खड़गे का यह बयान ‘एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट पर मचे भारी विवाद के बीच आया है, जिसमें मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के कुछ पहलुओं को लेकर चुनाव आयोग (EC) के भीतर असहमति का ज़िक्र किया गया था।
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपनी शुरुआती टिप्पणी में खड़गे ने पांच मांगें रखीं, जिनमें से एक यह थी कि मतदाता सूची में किए गए बड़े बदलावों का डेटा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जानी चाहिए और अपील करने का मौका मिलना चाहिए, साथ ही राजनीतिक दलों को मतदाता सूची का डेटा आसान फ़ॉर्मेट में समय पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
खड़गे ने आरोप लगाया कि एक साज़िश के तहत मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और CEC मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से योग्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कमज़ोर होती है।
उन्होंने गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा चुनाव से जुड़े डेटा और फैसलों में ज़्यादा पारदर्शिता की भी मांग की।
खड़गे ने CEC पर “दबाव” डालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक आधार पर इस्तीफ़े की भी मांग की। उन्होंने कहा, “ऐसे हालात में, उन्हें (ज्ञानेश कुमार को) पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री, जिनके दबाव में उन्होंने इस तरह काम किया, उन्हें खुद नैतिक आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।”
खड़गे ने कहा कि उनकी मांगों का मकसद मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना है।
कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री की सभी “खराब नीतियों” का खामियाज़ा गरीबों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वोट गरीबों, दलितों, वंचितों और समाज के शोषित वर्गों के लिए सबसे शक्तिशाली हथियार है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “इसीलिए मोदी जी यह अधिकार छीनना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “इतिहास गवाह है कि दस साल पहले, इसी प्रधानमंत्री ने ‘नोटबंदी’ के फैसले से भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया था। और अब, दस साल बाद, वह ‘वोटबंदी’ (मतदाताओं को वोट देने से रोकने) की साजिश के ज़रिए हमारे मज़बूत लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं।”
CWC की बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, मुकुल वासनिक और वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम समेत कई नेता शामिल हुए।
कांग्रेस शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों – डीके शिवकुमार (कर्नाटक), वीडी सतीसन (केरल), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना) और सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश) – ने भी बैठक में हिस्सा लिया। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस SIR के मुद्दे को सिर्फ़ चुनाव जीतने या हारने की लड़ाई के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़ी लोकतांत्रिक लड़ाई के तौर पर देखती है।
उन्होंने कहा, “चुनाव आते-जाते रहते हैं और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान हमेशा बने रहते हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की नींव है। हमें हर नागरिक तक यह बात पहुंचानी होगी कि लोकतंत्र में सबसे ताकतवर व्यक्ति आम वोटर होता है – न कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा कोई नेता।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस सिद्धांत की रक्षा करती रहेगी और अपनी लोकतांत्रिक ज़िम्मेदारी निभाती रहेगी। उन्होंने कहा, “यही संविधान की भावना है; यही लोकतंत्र की आत्मा है। कांग्रेस इस लोकतांत्रिक ज़िम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटेगी। इसे सुनिश्चित करने के लिए हमें जो कुछ भी करना पड़े – सड़कों से लेकर संसद तक – हम करेंगे।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस अहम जांच का ज़िक्र किया जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने कहा, “दो चुनाव आयुक्तों ने खुद CEC के कामों को मनमाना और अनुचित बताया है।”
‘एक्सप्रेस’ की जांच में बताया गया कि संधू और जोशी ने SIR और वोटर लिस्ट मैनेजमेंट के कई पहलुओं पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। उनकी चिंताओं में नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव, नामों को हटाने और फिर से जोड़ने की प्रक्रिया, वोटरों के नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील और वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज़ करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में “पूरी तस्वीर का सिर्फ़ एक हिस्सा” दिखाया गया है और कहा कि अलग-अलग राय होना सामान्य बातचीत का ही एक हिस्सा है। बाद में चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
