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कला संकुल में गूंजे सुर, थिरके कदम और जीवंत हुई लोककला की परंपरा

Melodies resonated, feet tapped, and the tradition of folk art came alive at the Art Complexदिलीप गुहा 

नई दिल्ली: भारतीय कला और संस्कृति की विविध परंपराओं को मंच देने वाला संस्कार भारती दिल्ली का ‘कला संकुल’ बीते सप्ताह अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों का साक्षी बना। शास्त्रीय संगीत और कथक से लेकर लोक एवं पारंपरिक चित्रकला तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा से प्रेरित समकालीन कला तक, विभिन्न आयोजनों ने कला के अलग-अलग रूपों को एक ही सांस्कृतिक परिसर में सामने रखा।

27 सितंबर को ‘भारतीय दृष्टि से समकालीन कथक—परंपरा, नवाचार और अभिव्यक्ति’ विषय पर कला संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक की परंपरा, उसके शास्त्रीय अनुशासन और बदलते समय में हो रहे प्रयोगों पर अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन तथा प्रीति सिन्हा समूह की कथक प्रस्तुति ने आयोजन को सजीव सांस्कृतिक अनुभव में बदल दिया।

26 सितंबर को दृश्य कला विद्या की ओर से ‘रंग मंजूषा’ लोक एवं पारंपरिक कला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदूरकर ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 33 कलाकारों की भागीदारी वाली इस प्रदर्शनी में मधुबनी, वरली, गोंड, पिछवाई, फड़, सुजनी, मंजूषा सहित देश की विभिन्न लोक एवं पारंपरिक कला शैलियों को प्रदर्शित किया गया है। इन कलाकृतियों में भारतीय लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों की विविध छवियां दिखाई देती हैं। प्रदर्शनी 30 सितंबर तक कला संकुल में दर्शकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।

इसी सांस्कृतिक श्रृंखला में 19 से 24 सितंबर तक एआईएफएसीएस गैलरी में कलाकार पंकज सचदेवा की एकल चित्रकला प्रदर्शनी ‘ETERNAL ECHOES’ आयोजित हुई। प्रदर्शनी में रामायण, महाभारत, शिव-शक्ति, बुद्ध, महावीर, सिख दर्शन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा जैसे विषयों को समकालीन प्रतीकात्मक शैली में अभिव्यक्त किया गया। चित्रों के माध्यम से भारतीय जीवन-दृष्टि, आध्यात्मिक चिंतन और मानवीय मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया।

कला संकुल में हुए इन आयोजनों की विशेषता यह रही कि यहां परंपरा केवल संरक्षित दिखाई नहीं दी, बल्कि संवाद और सृजन के माध्यम से वर्तमान से जुड़ती हुई दिखाई दी। शास्त्रीय कलाओं की साधना, लोक कलाओं की विरासत और समकालीन कलाकारों की अभिव्यक्ति का यह संगम कला संकुल को एक ऐसे सांस्कृतिक परिसर के रूप में सामने ला रहा है, जहां भारतीय कला की जड़ों से लेकर उसके वर्तमान स्वरूप तक को एक साथ अनुभव किया जा सकता है।

संस्कार भारती दिल्ली का कला संकुल इस प्रकार कलाकारों, कला-साधकों और कला-प्रेमियों के लिए भारतीय कला-संस्कृति के निरंतर संवाद, संरक्षण और सृजन का एक जीवंत मंच बनता जा रहा है।

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