फ्लाईदुबई हमले के बाद पीएम मोदी से बोले कैप्टन स्मित मछार, “उस वक्त मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा था”
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपने ही को-पायलट के हमले का सामना करने वाले कैप्टन स्मित मछार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने उस भयावह घटना के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि हमले के वक्त वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन मछार के साहस, सूझ-बूझ और संयम की सराहना की। पीएम मोदी ने उनका हालचाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा था।
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन मछार भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का उनसे बात करना उनके लिए बेहद खास पल है। उन्होंने कहा, “आप मेरे सबसे बड़े आदर्श हैं और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि आप मुझे फोन करके मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं।”
“मुझे लगा, अगर नहीं उठा तो मेरी मौत हो जाएगी”
कैप्टन मछार ने बुधवार को विमान में हुए हमले को याद करते हुए बताया कि उन्हें कई चोटें आई थीं, लेकिन उस वक्त उन्होंने खुद को संभालने और दोबारा खड़े होने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “मुझे कई चोटें आई थीं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस पल मैं अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा था। मैं गिर गया था, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं नहीं उठा, तो मेरी मौत हो जाएगी।”
कैप्टन मछार ने अपने लंबे उड़ान अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह 17 साल से अधिक समय से विमान उड़ा रहे हैं और पिछले 11 वर्षों से कैप्टन हैं। इसी अनुभव के कारण उन्हें अंदाजा था कि विमान में क्या स्थिति पैदा हो चुकी है और उस समय क्या करना जरूरी था।
उन्होंने कहा, “मैं 17 साल से ज्यादा समय से फ्लाइट उड़ा रहा हूं और पिछले 11 साल से कैप्टन हूं, इसलिए मैं आंखें बंद करके भी समझ सकता था कि प्लेन में क्या हो रहा है। मुझे पता था कि मुझे आखिरी बार जोर लगाना होगा।”
“पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोला”
कैप्टन मछार के मुताबिक, उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा खुलते ही विमान में मौजूद अन्य लोग भी कॉकपिट के अंदर पहुंच गए। उन्होंने कहा, “मैंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए पूरी ताकत लगाई और जैसे ही मैंने ऐसा किया, बाकी लोग अंदर आ गए। जो कुछ भी हुआ, उसमें सभी की बराबर भूमिका थी।”
कैप्टन मछार के इस बयान से यह भी सामने आया कि उस मुश्किल परिस्थिति में उन्होंने अपने अनुभव और हिम्मत का इस्तेमाल करते हुए हालात को संभालने की कोशिश की। बातचीत के दौरान उन्होंने इस पूरी घटना में मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
