खेल खिलाड़ी

लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में जीता गोल्ड

Lovlina Borgohain wins gold at the Asian Games.
(File Photo)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने अपने 29वें जन्मदिन को यादगार बना दिया। उन्होंने एशियाई खेलों में महिलाओं की 75 किग्रा कैटेगरी के फाइनल में चीन की ज़ियी बाओ को सर्वसम्मति से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ लवलीना 2014 में मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं।

लवलीना लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर के तौर पर गोल्ड मेडल मुकाबले में उतरी थीं। हांग्झू एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने के बाद इस बार उनका लक्ष्य मेडल का रंग बदलना था और उन्होंने फाइनल में शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए।

पहले राउंड में कड़ी टक्कर

लवलीना को चीनी बॉक्सर के मुकाबले अपनी लंबाई और रीच का फायदा मिला। उन्होंने मुकाबले की शुरुआत सकारात्मक अंदाज में की और बाओ के चेहरे पर कुछ अच्छे पंच लगाए। हालांकि, बाओ ने धीरे-धीरे मुकाबले में वापसी की और शरीर पर कुछ प्रभावी प्रहार किए।

चीनी बॉक्सर लवलीना के करीब आने लगीं और लगातार पंच बरसाने लगीं, जिसके कारण भारतीय खिलाड़ी को कुछ समय के लिए डिफेंसिव होना पड़ा। इसके बावजूद तीन जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला दिया और उन्होंने पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया।

दूसरे राउंड में भी लवलीना का दबदबा

दूसरे राउंड में बाओ ने आक्रामक शुरुआत की और लगातार पंच लगाने की कोशिश की। लवलीना ने अपरकट की जगह जैब और हुक का इस्तेमाल ज्यादा किया। एक मौके पर बाओ के जैब से लवलीना पीछे हटते हुए रिंग की रस्सियों तक पहुंच गईं और उन्होंने क्लिनच का सहारा लिया।

राउंड के अंतिम क्षणों में लवलीना ने कुछ अच्छे पंच लगाए, जिसका असर जजों के फैसले में भी दिखा। पांच में से चार जजों ने यह राउंड भारतीय बॉक्सर के पक्ष में दिया और लवलीना ने 4-1से बढ़त बना ली।

आखिरी राउंड में दिखाया शानदार डिफेंस

तीसरे और आखिरी राउंड में लवलीना ने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने डिफेंसिव रणनीति अपनाई, जिससे बाओ दबाव में आ गईं और ज्यादा आक्रामक होकर पंच लगाने की कोशिश करने लगीं।

लवलीना ने अपने डिफेंस और अनुभव का शानदार इस्तेमाल किया और चीनी बॉक्सर को कोई बड़ा मौका नहीं दिया। जैसे ही मुकाबला खत्म हुआ, भारतीय दल में खुशी की लहर दौड़ गई। नतीजे की घोषणा के साथ ही लवलीना ने अपने कॉर्नर के साथ जीत का जश्न मनाया।

पिछली हार से लिया सबक

एशियाई खेलों में उतरने से पहले लवलीना का लक्ष्य अपनी पिछली गलतियों को सुधारना था। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री से हारकर सिल्वर मेडल जीत पाई थीं। हालांकि, उन्होंने इस हार से निराश होने के बजाय अपनी कमियों पर काम करने का फैसला किया।

एशियाई खेलों से पहले इंडिया टुडे से बातचीत में लवलीना ने कहा था कि उन्होंने ग्लासगो से काफी कुछ सीखा है और यह समझने की कोशिश की है कि वह किन क्षेत्रों में और बेहतर कर सकती हैं। उनका लक्ष्य ट्रेनिंग के दौरान उन पहलुओं पर काम करना और रिंग में ज्यादा बेहतर तथा निरंतर प्रदर्शन करना था।

फाइनल में लवलीना के प्रदर्शन ने दिखाया कि उन्होंने अपनी तैयारियों पर कितनी मेहनत की थी। शानदार डिफेंस, सही रणनीति और आक्रामक पंचों के दम पर उन्होंने बाओ को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और अपने 29वें जन्मदिन को ऐतिहासिक बना दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *