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वैभव सूर्यवंशी की दावेदारी के बीच आलोचकों को संजू सैमसन का करारा जवाब, रांची में 41 गेंदों पर ठोके 82 रन

Sanju Samson's emphatic reply to critics amidst Vaibhav Sooryavanshi's rising contention: smashed 82 runs off 41 balls in Ranchi.चिरौरी न्यूज

रांची: भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दबाव के बीच वह अपने बल्ले से जवाब देना जानते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ रांची में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में सैमसन ने महज 41 गेंदों पर 82 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में नौ चौके और चार छक्के शामिल रहे। हाल के मैचों में रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे सैमसन के लिए यह पारी बेहद अहम रही, क्योंकि उनके प्रदर्शन और टीम में जगह को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

दिलचस्प बात यह रही कि सैमसन ने यह पारी रांची में खेली, जो चेन्नई सुपर किंग्स के उनके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का गृहक्षेत्र है। इसी मैदान पर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की क्षमता का शानदार नमूना पेश करते हुए चयन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अपनी दावेदारी मजबूत की।

वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले से पहले सैमसन की बल्लेबाजी चर्चा का विषय बनी हुई थी। उनके बल्ले से पिछला उल्लेखनीय योगदान अफगानिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज में आया था, जो इस मुकाबले से करीब 22 दिन पहले खेली गई थी। इसके बाद लगातार उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण उनकी टीम में जगह पर सवाल उठने लगे थे।

सैमसन के सामने चुनौती सिर्फ अपनी फॉर्म वापस पाने की नहीं थी, बल्कि टीम में जगह को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का जवाब देने की भी थी।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा ने भी क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। 15 वर्षीय इस बल्लेबाज को भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका मिलने का इंतजार है। ऐसे में टीम के स्थापित बल्लेबाजों के साधारण प्रदर्शन के बाद युवा खिलाड़ियों को मौका देने की मांग उठना स्वाभाविक है।

सैमसन के लिए इस बहस का जवाब देने का सबसे प्रभावी तरीका रन बनाना था और रांची में उन्होंने ऐसा ही किया।

‘रन बनाते रहना ही एकमात्र रास्ता’

मुकाबले से पहले सैमसन ने अपने खेल के प्रति सोच स्पष्ट करते हुए कहा था कि बल्लेबाज को अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए और अपनी योजना पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा था, “आप बस रन बनाते रहने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।” सैमसन ने अपने खेल की योजना और शॉट चयन को लेकर स्पष्टता के महत्व पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, टी20 जैसे छोटे प्रारूप में बल्लेबाज को अपनी रणनीति पर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए और मैदान पर खुलकर खेलना चाहिए।

रांची में उनकी बल्लेबाजी में यही सोच दिखाई दी। उन्होंने शुरुआत में जल्दबाजी करने के बजाय परिस्थितियों को समझा, गेंद को सही समय पर खेला और जब लय हासिल कर ली तो वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर आक्रामक प्रहार किए।

भारतीय पारी की शुरुआत में अभिषेक शर्मा ने अपने परिचित आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि दूसरे छोर पर मौजूद सैमसन ने अपेक्षाकृत संयमित शुरुआत की।

दोनों बल्लेबाजों के खेलने के तरीके में साफ अंतर दिखाई दिया। अभिषेक शुरुआत से ही बड़े शॉट लगाने के इरादे से उतरे, जबकि सैमसन ने गेंद को गैप में खेलकर रन जुटाने पर ध्यान दिया।

यहां तक कि वेस्टइंडीज के स्पिनर अकील हुसैन के खिलाफ भी, जो चेन्नई सुपर किंग्स में सैमसन के साथी हैं, उन्होंने अनावश्यक रूप से आक्रामक होने से परहेज किया।

सैमसन ने अपनी टाइमिंग, गेंद की दिशा और शॉट चयन पर भरोसा किया। उन्होंने दिखाया कि उनकी बल्लेबाजी की ताकत सिर्फ बड़े छक्के लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मैदान में खाली जगह तलाशकर भी तेजी से रन बना सकते हैं।

धीरे-धीरे लय हासिल करने के बाद उन्होंने अपने शॉट्स की रफ्तार बढ़ाई और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को दबाव में ला दिया। उनकी 41 गेंदों पर 82 रन की पारी संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मेल रही।

संजू सैमसन के करियर में अक्सर उनकी प्रतिभा और निरंतरता को लेकर चर्चा होती रही है। जब वह बड़ी पारी खेलते हैं तो उनकी क्षमता की तारीफ होती है, लेकिन कुछ मैचों में रन नहीं बनने पर उनकी जगह को लेकर सवाल उठने लगते हैं।

सैमसन इस तरह की चर्चाओं से निपटने के लिए अपनी दिनचर्या को सरल रखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि बाहरी शोर और अनावश्यक ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहने के लिए वह अपना फोन बंद कर देते हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ी को उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें वह खुद नियंत्रित कर सकता है।

मुकाबले से पहले उन्होंने कहा था, “उन चीजों पर ध्यान दें, जो आपके नियंत्रण में हैं। नकारात्मक शोर को दूर रखें, सकारात्मक बातों पर ध्यान दें और चीजों को सरल बनाए रखें।”

सैमसन के मुताबिक, खेल के प्रति स्पष्ट सोच बनाए रखना और अपनी रणनीति पर भरोसा करना बेहद जरूरी है। रांची में उनकी पारी इसी दृष्टिकोण का उदाहरण रही।

सैमसन के लिए बड़े मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता नई नहीं है। भारत के टी20 विश्व कप 2026 अभियान में उनके योगदान ने भी दबाव की परिस्थितियों में प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता को सामने रखा था।

रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी 82 रन की पारी ने एक बार फिर दिखाया कि वह मुश्किल दौर में वापसी करने का माद्दा रखते हैं। हालांकि, टीम में अपनी जगह पक्की बनाए रखने के लिए उन्हें आगे भी प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखनी होगी।

संजू सैमसन की यह पारी सिर्फ 82 रन तक सीमित नहीं रही। यह उनके लिए फॉर्म, आत्मविश्वास और टीम में अपनी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का बल्ले से जवाब देने का मौका भी थी। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों की चर्चा के बीच सैमसन ने साफ कर दिया कि वह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए मैदान पर प्रदर्शन को ही सबसे अहम मानते हैं।

 

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