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गौतम गंभीर की मयंक यादव को दो टूक सलाह, ‘तेज गेंदबाज हो तो अपनी रफ्तार पर भरोसा रखो’

Gautam Gambhir's blunt advice to Mayank Yadav: "If you are a fast bowler, back your pace."
(Pic: IPL/Twitter)

चिरौरी न्यूज

रांची: टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के आक्रामक अंदाज के बीच गेंदबाजों के लिए अपनी रणनीति में लगातार बदलाव करना जरूरी हो गया है। धीमी गेंद, कटर और रफ्तार में बदलाव जैसे हथियार गेंदबाजों के लिए अहम बन चुके हैं। हालांकि, भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर का मानना है कि तेज गेंदबाज को अपनी सबसे बड़ी ताकत नहीं भूलनी चाहिए। अगर कोई गेंदबाज 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल सकता है, तो उसे अपनी गति पर भरोसा करना चाहिए।

वेस्टइंडीज के खिलाफ रांची में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मयंक यादव की प्रभावशाली गेंदबाजी के बाद गंभीर ने यह बात कही। मयंक ने लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते हुए वेस्टइंडीज के शीर्ष क्रम को झकझोर दिया। उनके प्रदर्शन से प्रभावित गंभीर ने साफ कहा कि मयंक एक तेज गेंदबाज हैं और उन्हें अपनी पहचान के मुताबिक ही गेंदबाजी करनी चाहिए।

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौतम गंभीर ने मयंक यादव की गेंदबाजी को लेकर अपनी राय स्पष्ट शब्दों में रखी। उन्होंने कहा, “वह एक तेज गेंदबाज है और उसे तेज गेंदबाजी करनी चाहिए। वह धीमी गेंद डालने वाला गेंदबाज नहीं है। अगर आप 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल सकते हैं, तो 150 की रफ्तार से गेंद डालिए। अगर आप 120 की रफ्तार से गेंद डाल सकते हैं, तो उसी गति से गेंद डालिए। जब आप तेज गेंदबाज हैं, तो तेज गेंद डालना आपकी जिम्मेदारी है। मयंक ने यही किया और इसी वजह से वह सफल रहे।”

गंभीर के इस बयान का मुख्य संदेश साफ था कि गेंदबाज को अपनी स्वाभाविक क्षमता पर भरोसा करना चाहिए। टी20 क्रिकेट में विविधता जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तेज गेंदबाज अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी रफ्तार से ही दूर हो जाए।

मयंक यादव के लिए पिछला मुकाबला अच्छा नहीं रहा था। लखनऊ में खेले गए मैच में वह अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे थे। इंडियन प्रीमियर लीग में लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से खेलने के कारण उन्हें वहां की परिस्थितियों का अनुभव भी था, लेकिन इसके बावजूद वह अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके और भारतीय गेंदबाजों में महंगे साबित हुए।

उस मुकाबले में मयंक अपनी गति में लगातार बदलाव करते और अलग-अलग लाइन पर गेंद डालते नजर आए। हालांकि, इन प्रयासों से उन्हें वह नियंत्रण और सफलता नहीं मिल सकी, जिसकी टीम को जरूरत थी।

रांची में उन्होंने अपनी रणनीति को सरल रखा। उन्होंने अपनी स्वाभाविक रफ्तार पर भरोसा किया और नई गेंद से ही वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

उनकी तेज गेंदों ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंदबाजी करते हुए उन्होंने शुरुआती ओवरों में भारतीय टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं।

लगातार दो गेंदों पर विकेट लेकर वेस्टइंडीज को दिया झटका

मयंक यादव ने रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी गेंदबाजी से मैच के शुरुआती समीकरण बदल दिए। उन्होंने लगातार दो गेंदों पर कामिल पूरन और शिमरोन हेटमायर को आउट कर दिया। हेटमायर पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए।

इसके बाद पावरप्ले के अंतिम ओवर में मयंक ने रोवमैन पॉवेल का विकेट हासिल किया। पॉवेल उस समय आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन मयंक की तेज गेंद ने उनकी पारी का अंत कर दिया।

इस तरह वेस्टइंडीज ने शुरुआती छह ओवरों के भीतर तीन विकेट गंवा दिए। भारतीय टीम को रन चेज की शुरुआत में ही मजबूत स्थिति हासिल करने का मौका मिला।

मयंक का यह स्पेल उनकी सबसे बड़ी ताकत का उदाहरण था। उन्होंने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को दबाव में रखा, विकेट हासिल किए और उन्हें सहज होकर रन बनाने से रोका।

गौतम गंभीर की टिप्पणी को इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि तेज गेंदबाजों को धीमी गेंद या अन्य विविधताओं का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। उनके बयान का असल संदेश यह था कि गेंदबाज को अपनी प्राथमिक ताकत पहचाननी चाहिए और परिस्थितियों के मुताबिक उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए।

टी20 क्रिकेट में बल्लेबाज लगातार गेंदबाजों की रणनीति को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में गेंद की गति बदलना, कटर डालना और लाइन-लेंथ में बदलाव करना उपयोगी हो सकता है। लेकिन ये विविधताएं तभी ज्यादा प्रभावी होती हैं, जब वे गेंदबाज की मुख्य क्षमता को मजबूत करें, न कि उसकी जगह ले लें।

मयंक यादव के मामले में उनकी रफ्तार ही सबसे बड़ा हथियार है। ऐसे में उन्हें जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने के बजाय अपनी गति, सटीकता और आक्रामक लाइन पर ध्यान देने की जरूरत है।

रांची में मयंक यादव का प्रदर्शन बताता है कि खराब मुकाबले के बाद वापसी करने के लिए हमेशा अपनी पूरी रणनीति बदलने की जरूरत नहीं होती। कई बार अपनी बुनियादी ताकत पर भरोसा करना ही सबसे प्रभावी रास्ता होता है।

लखनऊ में संघर्ष करने के बाद मयंक ने रांची में नई गेंद से आक्रामक गेंदबाजी की और शुरुआती ओवरों में भारत को अहम विकेट दिलाए। उनकी गेंदबाजी ने यह भी दिखाया कि तेज गति बल्लेबाजों पर दबाव बनाने और उनकी गलतियां सामने लाने में कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

गंभीर की सलाह इसी सोच को रेखांकित करती है। तेज गेंदबाज के लिए रफ्तार सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उसकी पहचान और सबसे बड़ा हथियार हो सकती है।

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